उत्तर प्रदेश नवनिर्माण के नौ वर्ष : स्वास्थ्य सेवाओं में ‘उत्तम प्रदेश’ बना देश में अग्रणी

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लखनऊ, 24 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है। यूपी सरकार ने इस दौरान न केवल आधारभूत ढांचे को मजबूत किया, बल्कि डिजिटल हेल्थ, आपात सेवाओं, मातृ-शिशु देखभाल समेत स्वास्थ्य सेवा के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश आज कई स्वास्थ्य मानकों पर देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। योगी सरकार ने प्रदेश में डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 5.76 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ…

लखनऊ, 24 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है। यूपी सरकार ने इस दौरान न केवल आधारभूत ढांचे को मजबूत किया, बल्कि डिजिटल हेल्थ, आपात सेवाओं, मातृ-शिशु देखभाल समेत स्वास्थ्य सेवा के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश आज कई स्वास्थ्य मानकों पर देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है।

योगी सरकार ने प्रदेश में डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 5.76 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किए हैं। माइक्रोसाइट प्रोजेक्ट के तहत 35 माइक्रोसाइट्स का संचालन किया जा रहा है, जहां 4.4 लाख से अधिक रिकॉर्ड पंजीकृत कर प्रदेश ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके साथ ही यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल के माध्यम से रोगों की निगरानी और रोकथाम को अधिक प्रभावी बनाया गया है। अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और उनकी कार्यक्षमता पर नजर रखने के लिए ‘केयर मॉडल’ लागू किया गया है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य हुए हैं।

गर्भवती महिलाओं को निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए ई-वाउचर की सुविधा दी गई है। जननी सुरक्षा योजना के तहत 13,51,044 लाभार्थियों को लाभ मिला है, जबकि बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 8,79,642 बच्चों का उपचार किया गया है। दस्तक अभियान के जरिए एईएस-जेई जैसी बीमारियों के खिलाफ सघन अभियान चलाया गया। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 22,681 आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हैं। आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट के तहत 13.18 करोड़ से अधिक लोगों का पंजीकरण किया गया है। हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री में 81,615 से अधिक पंजीकरण कर प्रदेश देश में अग्रणी बना है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत 1.31 करोड़ परिवारों के 5.59 करोड़ लाभार्थियों के कार्ड बनाए गए हैं। 9 करोड़ से अधिक लोगों को 5 लाख रुपए तक का निशुल्क चिकित्सा सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 7.34 करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के तहत 50.64 लाख परिवारों के 1.50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा दी गई है। स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार में भी प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है। सभी जिलों में 873 जन औषधि केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। 63,407 हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन के साथ उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। प्रदेश में अब तक 13,353 करोड़ रुपए खर्च कर 81.55 लाख मरीजों का निशुल्क उपचार किया जा चुका है।

आयुष्मान योजना से जुड़े 6,213 अस्पतालों (2,950 सरकारी और 3,263 निजी) का नेटवर्क देश में सबसे बड़ा है। आपातकालीन सेवाओं में 108 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से 4 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिला है। एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाकर 375 कर दी गई है। एम्बुलेंस सेवाओं की पहुंच और क्षमता में सुधार करते हुए प्रतिदिन की दूरी 60 किमी से बढ़ाकर 120 किमी कर दी गई है। इसके साथ ही मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए 1.80 करोड़ से अधिक मरीजों का उपचार किया गया है।

योगी सरकार में प्रदेश में 75 जिलों के अस्पतालों में निशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे 41.46 लाख से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं। जिलों में सीटी स्कैन सेवा शुरू की गई है। दूरदराज के क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन और टेली कंसल्टेशन के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने के लिए योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की स्थापना की, जिससे दवाओं की गुणवत्ता और आपूर्ति में पारदर्शिता आई है। साथ ही, 798 स्वास्थ्य इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है।

खाद्य सुरक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी प्रदेश ने कदम बढ़ाए हैं। 36 मोबाइल प्रयोगशालाओं के माध्यम से खाद्य पदार्थों की जांच की जा रही है। लखनऊ, मेरठ और वाराणसी में माइक्रोबायोलॉजी लैब स्थापित कर खाद्य गुणवत्ता की निगरानी को मजबूत किया गया है। फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रमोद फार्म’ संस्था की स्थापना भी की गई है। इसके अलावा, प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा योजना लागू की गई है, जिससे उन्हें कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है। वहीं, विभिन्न विभागों से जुड़े लाखों परिवारों को भी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में शामिल किया गया है।

–आईएएनएस

एसके/एबीएम

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