नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। नवरात्र के चौथे दिन यानी 22 मार्च को वासुदेव चतुर्थी मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार चैत्र मास, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश के वासुदेव रूप की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने के बाद ब्राह्मणों को दान करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता है कि भक्ति से इस व्रत का पालन करने से भगवान विष्णु के लोक की प्राप्ति होती है। मुद्गल पुराण जैसे ग्रंथों में कहा गया है कि विघ्न विनाशन गणेश का पूजन करने से सुख-सौभाग्य बढ़ता है। चैत्र शुक्ल चतुर्थी व्रत हिंदू धर्म में बहुत पुण्यदायी और सिद्धिप्रदायक माना जाता है। इसे विनायक चतुर्थी या गणेश चतुर्थी भी कहते हैं। स्कंदपुराण और भविष्यपुराण जैसे ग्रंथों में इसका वर्णन मिलता है। श्रद्धा से इस व्रत को रखने से विघ्नों का नाश होता है, कार्यों में सफलता मिलती है, सिद्धि और बुद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं, नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा की आराधना से जुड़ा है।
दृक पंचांग के अनुसार, सूर्योदय 6 बजकर 23 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 33 मिनट पर होगा। 22 मार्च को चतुर्थी तिथि रात 9 बजकर 16 मिनट तक है। नक्षत्र भरणी रात 10 बजकर 42 मिनट तक है।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 48 मिनट से 5 बजकर 36 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 32 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक अमृत काल शाम 6 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। साथ ही रवि योग सुबह 6 बजकर 23 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट रात तक रहेगा।
22 मार्च के अशुभ समय का विचार भी जरूरी है। इनमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं। रविवार को राहुकाल शाम 5 बजकर 2 मिनट से 6 बजकर 33 मिनट तक, यमगंड दोपहर 12 बजकर 28 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक, गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 31 मिनट से शाम 5 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। वहीं, दुर्मुहूर्त शाम 4 बजकर 56 मिनट से 5 बजकर 45 मिनट तक और भद्रा सुबह 10 बजकर 36 मिनट से रात 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।
–आईएएनएस
एमटी/एएस
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