देश में पीरियड्स हाइजीन पर सामने आए नए आंकड़े, कई राज्यों में स्थिति अब भी चिंताजनक

Summary :

राज्यसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, देश की 79.2% युवतियां पीरियड्स के दौरान सुरक्षित तरीके अपना रही हैं। हालांकि, तमिलनाडु (98.3%) और बिहार (58.9%) के आंकड़ों से राज्यों के बीच बड़ा अंतर साफ झलकता है।

NFHS 6 Period Hygiene Data

NFHS 6 Period Hygiene Data : माहवारी यानी पीरियड्स के दौरान सफाई और सही जानकारी महिलाओं की हेल्थ से सीढ़ी जुड़ी हैं। इस बीच राज्यसभा में सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़े देश में पीरियड्स हाइजीन की एक नई तस्वीर पेश करते हैं।

सरकार के अनुसार, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों में 15 से 24 साल की उम्र की 79.2% युवतियां माहवारी के दौरान स्वच्छता के सुरक्षित तरीके अपना रही हैं। हालांकि, पिछले सर्वे NFHS-5 के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ होता है कि देश के अलग-अलग राज्यों और सामाजिक वर्गों में इस मामले को लेकर काफी अंतर बना हुआ है।

कहीं 90% से पार, तो कहीं 60% पर अटका आंकड़ा

माहवारी के दौरान हाइजीन प्रॉडक्ट्स और सुरक्षित तरीकों के इस्तेमाल के मामले में देश के राज्यों में बड़ा अंतर देखा गया है। एनएफएचएस-5 के अनुसार, तमिलनाडु इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां 98.3% महिलाएं स्वच्छ तरीके अपनाती हैं। वहीं दिल्ली में यह आंकड़ा 96.9%, गोवा में 96.8%, पंजाब व हरियाणा में 93.2% और केरल में 93.1% दर्ज किया गया।

इसके ठीक विपरीत, कई राज्यों में स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। बिहार में यह दर महज 58.9% है, जो देश में सबसे कम में से एक है। मध्य प्रदेश में 60.5%, मेघालय में 64.9%, गुजरात में 66.5% और असम में 66.9% मtoday top story, हिलाएं ही पीरियड्स हाइजीन का ध्यान रख पाती हैं। उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 72.6% और झारखंड में 74.9% रहा।

सामाजिक वर्गों में भी दिखा बड़ा अंतर

सरकारी रिपोर्ट की एक अहम बात यह है कि इसमें केवल कुल आंकड़े ही नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं का अलग से डेटा भी दिया गया है। आंकड़ों से साफ है कि एक ही राज्य के भीतर सामाजिक समूहों के बीच बड़ा अंतर मौजूद है।

  • बिहार: कुल आंकड़ा 58.9% है, लेकिन यहां SC महिलाओं में यह दर केवल 49.2% और ST महिलाओं में 56.6% ही है।
  • मध्य प्रदेश: जहां कुल आंकड़ा 60.5% है, वहीं ST वर्ग की महिलाओं में यह गिरकर 41.2% पर आ जाता है।
  • उत्तर प्रदेश: राज्य का औसत 72.6% है, लेकिन SC महिलाओं में यह 68.3% और ST में 63% दर्ज हुआ।
  • उत्तराखंड : उत्तराखंड का कुल आंकड़ा 91.2% है, लेकिन यहां ST वर्ग की महिलाओं में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 98.9% तक पहुंचा है, जो राज्य के औसत से भी बेहतर है।

आंकड़ों में अंतर की मुख्य वजहें

एक्सपर्ट्स और आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि इस अंतर के पीछे केवल एक कारण नहीं है। परिवार की आर्थिक स्थिति, सैनिटरी पैड या अन्य साधनों का महंगा होना, साफ पानी और शौचालयों की कमी इसके बड़े कारण हैं। इसके अलावा ग्रामीण व दूरदराज के इलाकों में जागरूकता का अभाव और पीरियड्स को लेकर सामाजिक झिझक भी महिलाओं को खुलकर जरूरत बताने से रोकती है।

सरकार की पहल और योजनाएं

सरकार ने स्पष्ट किया कि माहवारी स्वच्छता प्रबंधन को बेहतर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ‘मेन्स्ट्रुअल हाइजीन स्कीम’ चलाई जा रही है। इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर लागू किया जाता है। सरकार का मानना है कि पीरियड्स हाइजीन को सिर्फ सैनिटरी पैड के वितरण तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसके लिए पीने का साफ पानी, पर्सनल हाइजीन और टॉयलेट जैसी सुविधाओं का होना भी उतना ही जरूरी है।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।