नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और प्रमुख वित्तीय संस्थानों के बीच सहयोग, विचार-विमर्श और सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार 17-18 अगस्त को राष्ट्रीय राजधानी में ‘पीएसबी कॉन्फ्लुएंस’ नामक दो दिवसीय आइडियेशन कॉन्क्लेव का आयोजन करने जा रही है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की उपस्थिति में आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (पीएफआई) के शीर्ष नेतृत्व एक मंच पर आएंगे, ताकि देश की आर्थिक और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप नई बैंकिंग रणनीतियों पर चर्चा की जा सके।
इस कॉन्क्लेव में लगभग 125 वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक (एमडी) और कार्यकारी निदेशक (ईडी) शामिल होंगे।
इसके अलावा, नाबार्ड, एक्सिम बैंक, सिडबी, एनएचबी, आईआईएफसीएल, आईएफसीआई और नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (एनएबीएफआईडी) जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों के अधिकारी भी इसमें हिस्सा लेंगे।
वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ठोस, समयबद्ध और जनकेंद्रित रणनीतियों को तैयार करना होगा, जिन्हें बैंकिंग तंत्र में लागू किया जा सके।
यह मंच विभिन्न संस्थानों को अपने सफल अनुभव साझा करने, नई पहलों पर विचार करने और उन व्यावहारिक उपायों पर चर्चा करने का अवसर देगा, जिन्हें पूरे बैंकिंग क्षेत्र में अपनाया जा सकता है।
मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन के लिए चुने गए विषय सीधे तौर पर नागरिक कल्याण और समावेशी आर्थिक विकास से जुड़े हैं। चर्चा के दौरान सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए संसाधन आधार को मजबूत बनाने, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन हेतु निवेश चक्र को गति देने और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) इकोसिस्टम को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
इसके अलावा, कृषि और बागवानी क्षेत्र की वैल्यू-चेन अवसंरचना, फसल कटाई के बाद की आवश्यकताओं, बाजार संपर्क (मार्केट लिंकिंग), प्राथमिकता क्षेत्र ऋण और बैंकिंग सेवाओं से वंचित वर्गों तक औपचारिक ऋण पहुंचाने जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
युवा आबादी की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए उनके लिए विशेष बैंकिंग उत्पाद विकसित करने पर भी विचार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन विषयों के माध्यम से नीतिगत और संस्थागत हस्तक्षेपों को आम लोगों के जीवन में ठोस और मापनीय परिणामों में बदला जा सकता है।
कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न विषयों पर अलग-अलग थीमैटिक ट्रैक बनाए जाएंगे, जिनका समन्वय चुनिंदा बैंक और वित्तीय संस्थान करेंगे।
बयान में कहा गया है कि इन थीमैटिक ट्रैक्स में प्रमुख रूप से डिपॉजिट मोबिलाइजेशन, युवाओं के लिए बैंकिंग, निवेश चक्र को समर्थन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर को बढ़ावा, कृषि एवं बागवानी वैल्यू-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, क्रेडिट कार्ड कारोबार की नई कल्पना और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण जैसे विषय शामिल होंगे।
–आईएएनएस
डीबीपी
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