New Delhi: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा लोगों से की गई अपील यह संकेत देती है कि देश की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। केजरीवाल ने मांग की कि सरकार देशवासियों के सामने आर्थिक हालात की पूरी सच्चाई रखे ताकि अफवाहों और भ्रम की स्थिति खत्म हो सके। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष Saurabh Bharadwaj के साथ बातचीत करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सात बड़े कदम उठाने की अपील की है। इनमें वर्क फ्रॉम होम अपनाने, सोना कम खरीदने, पेट्रोल-डीजल की बचत करने, सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने, विदेश यात्रा से बचने, विदेशी उत्पाद कम खरीदने और खाने के तेल व उर्वरक के सीमित उपयोग जैसी बातें शामिल हैं।
केजरीवाल का कहना था कि आजादी के बाद देश ने कई कठिन दौर देखे हैं। चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध भी हुए और आर्थिक संकट भी आए, लेकिन किसी प्रधानमंत्री ने एक साथ इतने बड़े और कठोर कदम अपनाने की अपील नहीं की। उन्होंने कहा कि इससे देश के लोगों के मन में चिंता और असमंजस पैदा हो रहा है।
New Delhi: देश को आर्थिक स्थिति की सच्चाई बताने की मांग

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर सरकार लोगों से त्याग और बचत की अपील कर रही है तो देशवासियों को यह भी जानने का अधिकार है कि आखिर देश की आर्थिक स्थिति कितनी खराब है। उन्होंने कहा कि लोग देश के लिए कठिनाइयों का सामना करने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि आने वाले महीनों में देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है, इसकी साफ तस्वीर देश के सामने रखी जाए। उनके मुताबिक सिर्फ आदेश देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि लोगों को भरोसे में लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस समय देश में तरह-तरह की अफवाहें फैल रही हैं और इससे आर्थिक विश्वास कमजोर हो सकता है।
ईरान-अमेरिका तनाव का भी किया जिक्र
केजरीवाल ने कहा कि सरकार इन कदमों के पीछे ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को वजह बता रही है। उनका कहना था कि इस संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, लेकिन किसी अन्य देश की सरकार ने अपने नागरिकों से इस तरह की कठोर अपील नहीं की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बाकी देश सामान्य तरीके से स्थिति का सामना कर रहे हैं, तो भारत में लोगों से इतनी बड़ी बचत और कटौती की अपील क्यों की जा रही है। उनके मुताबिक इससे लोगों के मन में यह शक पैदा हो रहा है कि कहीं देश की आर्थिक स्थिति आधिकारिक दावों से ज्यादा खराब तो नहीं है।
मिडिल क्लास पर बोझ डालने का आरोप
अरविंद केजरीवाल ने सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर जताई कि इन सभी अपीलों का असर सीधे मिडिल क्लास पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विदेश यात्रा रोकना, सोना न खरीदना, गाड़ी कम इस्तेमाल करना और सार्वजनिक परिवहन अपनाना जैसी बातें आम मध्यम वर्गीय परिवारों को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि मिडिल क्लास हमेशा देश के साथ खड़ा रहा है और जरूरत पड़ने पर हर तरह की कुर्बानी देने को तैयार रहता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर हर बार सिर्फ उसी वर्ग से त्याग की उम्मीद क्यों की जाती है।
सरकार और नेताओं को भी करनी चाहिए कटौती
केजरीवाल ने कहा कि अगर देश आर्थिक संकट में है तो सबसे पहले सरकार को अपने खर्चों में कटौती करनी चाहिए। उनके मुताबिक केंद्र सरकार ने अब तक अपने खर्च कम करने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री, मंत्री और बड़े अधिकारी भी अपने निजी खर्चों में कटौती कर सकते हैं। विदेश यात्राएं कम की जा सकती हैं, सरकारी खर्च घटाए जा सकते हैं और विलासिता पर रोक लगाई जा सकती है। लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा। उनका कहना था कि जब आम लोगों से लगातार बचत और त्याग की बात कही जाती है, तब सरकार और सत्ता में बैठे लोगों को भी उदाहरण पेश करना चाहिए।
उद्योगपतियों पर भी उठाए सवाल
अरविंद केजरीवाल ने देश के बड़े उद्योगपतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर आर्थिक संकट इतना गंभीर है तो बड़े कारोबारी घरानों और अमीर लोगों से भी खर्च कम करने की अपील की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि देश के अरबपति और बड़े उद्योगपति भी देश का हिस्सा हैं, इसलिए जिम्मेदारी सिर्फ मिडिल क्लास पर नहीं डाली जानी चाहिए। उनके मुताबिक सरकार को हर वर्ग से समान रूप से सहयोग मांगना चाहिए।
केजरीवाल ने कहा कि वर्तमान हालात को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ रही है। आम लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर सरकार किन परिस्थितियों को देखते हुए इतनी बड़ी अपील कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते सरकार स्पष्ट जानकारी नहीं देती है तो लोगों के मन में भ्रम और डर बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक मामलों में पारदर्शिता बहुत जरूरी होती है। जब सरकार खुलकर जानकारी साझा करती है तो लोगों का भरोसा मजबूत होता है और वे कठिन समय में भी सरकार का साथ देते हैं।
देशहित में सहयोग देने को तैयार लोग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश के लोग देशभक्त हैं और देशहित में हर जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार हैं। लेकिन त्याग और जिम्मेदारी सिर्फ एक वर्ग तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार, मंत्री, अधिकारी और उद्योगपति भी अगर समान रूप से जिम्मेदारी निभाएं तो लोगों को यह महसूस होगा कि संकट से निपटने की लड़ाई सब मिलकर लड़ रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार देश की आर्थिक स्थिति को लेकर पूरी सच्चाई जनता के सामने रखे और सिर्फ मिडिल क्लास को निशाना न बनाया जाए।
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