2029 में देश के अंदर ”One Nation One Election” के तहत होंगे चुनाव? पैनल चीफ ने बताया पूरा प्लान

Summary :

केंद्र सरकार की तरफ से देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारियां जोरो पर है। ऐसे में इस मुद्दे पर बनी संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) अब ऐसे सुझाव जुटा रही है, जिनकी मदद से  फ्यूचर में पूरे देश के अंदर लोकसभा और विधानसभा चुनाव  एक ही साथ  सम्पन्न हो सकें।  समिति का लक्ष्य ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिस पर सभी पक्षों की  सहमति बन सके। जेपीसी के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने गोवा में आयोजित समिति की दो दिवसीय बैठक में कहा कि समिति इस दिशा में तेजी से अपनी रूप रेखा (India Election Reform)  पर…

केंद्र सरकार की तरफ से देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारियां जोरो पर है। ऐसे में इस मुद्दे पर बनी संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) अब ऐसे सुझाव जुटा रही है, जिनकी मदद से  फ्यूचर में पूरे देश के अंदर लोकसभा और विधानसभा चुनाव  एक ही साथ  सम्पन्न हो सकें।  समिति का लक्ष्य ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिस पर सभी पक्षों की  सहमति बन सके। जेपीसी के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने गोवा में आयोजित समिति की दो दिवसीय बैठक में कहा कि समिति इस दिशा में तेजी से अपनी रूप रेखा (India Election Reform)  पर काम कर रही है। ऐसे में यह प्रयास किए जा रहे हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का सिस्टम तैयार हो सके।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,  उन्होंने आगे  बताया कि  गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और राज्य सरकार के मंत्रियों के साथ भी इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में उन चुनौतियों पर विचार किया गया, जो पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के रास्ते में रोड़ा बन सकती हैं। इसके साथ ही  उनके समाधान पर भी मंथन किया गया।

कई राज्यों में जाकर ली गई राय

PC Chairman statement ONOE (credit social media )
PC Chairman statement ONOE (credit social media )

JPC अब तक गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गोवा समेत  कई राज्यों का दौरा कर चुकी है। इन दौरों के दौरान समिति ने संवैधानिक एक्सपर्ट, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और अन्य संबंधित लोगों से सुझाव लिए हैं।समिति का मानना है कि सभी पक्षों की राय जानने के बाद ही ऐसा प्रस्ताव तैयार किया जाएगा, जो व्यावहारिक होने के साथ-साथ सभी के लिए स्वीकार्य भी हो।

पीपी चौधरी के अनुसार, समिति को अब तक मिली राय में करीब  99 प्रतिशत नागरिक संगठनों और अन्य हितधारकों ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के विचार का अपना समर्थन दिया है।  उन्होंने कहा कि समिति ऐसा मॉडल तैयार कर रही है, जिस पर राजनीतिक दलों के बीच भी सहमति बन सके। यदि सभी दल सहयोग करें तो इस सिस्टम को लागू करना बेहद  आसान होगा।

2029 में लागू हो सकता है सिस्टम?

Lok Sabha Election 2029 (credit social media )
Lok Sabha Election 2029 (credit social media )

जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि अगर  कुछ राज्य सरकारें और राजनीतिक दल खुद से तैयार  हो जाएं , तो कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों का समय लोकसभा चुनाव के साथ मिलाया जा सकता है। इससे 2029 से पहले भी चुनावी चक्र को एक समान करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। पीपी चौधरी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली हाई लेवल  समिति के सामने प्रस्तुत एक आर्थिक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि देश में अलग-अलग समय पर चुनाव होने से हर साल करीब 7 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक खर्च आता है।  उनके अनुसार, अगर  लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं, तो चुनाव पर होने वाला खर्च कम आएगा और सरकार विकास कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकेगी। इससे प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना भी हो सकेगा।

पढ़ाई और सरकारी काम पर भी पड़ता है असर

India Voting System Changes (credit social media )
India Voting System Changes (credit social media )

इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि  बार-बार चुनाव होने की वजह से   बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और टीचर्स  की चुनाव ड्यूटी लगानी पड़ती है। इसका असर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई पर पड़ता है। खासकर गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता है।  इसके अलावा चुनाव आचार संहिता लागू होने से कई सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं की स्पीड भी स्लो पड़ जाती है।

पीपी चौधरी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुसार ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ देश में बड़ा चुनावी सुधार साबित हो सकता है। इससे चुनावी खर्च कम होगा, प्रशासन अधिक प्रभावी ढंग से काम पर ध्यान दे सकेगा और विकास कार्यों में तेजी आएगी। समिति का मानना है कि  अगर यह सिस्टम सफलतापूर्वक लागू होती है, तो देश की शासन प्रणाली और मजबूत होगी और साल 2047 तक  भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में भी भारी मदद मिलेगी।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।