ओवरलोडिंग पर नए टोल नियमों को लेकर एआईएमजीटीए की आपत्ति

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नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (एआईएमजीटीए) ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (संशोधन) नियम, 2026 पर गहरी चिंता जताई है। ये नए नियम 15 अप्रैल 2026 से लागू हो गए हैं। नए नियमों के अनुसार, अगर वाहन अपनी अनुमानित कुल भार सीमा (जीवीडब्ल्यू) से ज्यादा लदा हुआ पाया जाता है तो टोल प्लाजा पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। 10 प्रतिशत तक ओवरलोडिंग पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। 10 से 40 प्रतिशत तक ओवरलोडिंग पर दोगुना टोल और 40 प्रतिशत से ज्यादा ओवरलोडिंग पर चार…

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (एआईएमजीटीए) ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (संशोधन) नियम, 2026 पर गहरी चिंता जताई है। ये नए नियम 15 अप्रैल 2026 से लागू हो गए हैं।

नए नियमों के अनुसार, अगर वाहन अपनी अनुमानित कुल भार सीमा (जीवीडब्ल्यू) से ज्यादा लदा हुआ पाया जाता है तो टोल प्लाजा पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। 10 प्रतिशत तक ओवरलोडिंग पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। 10 से 40 प्रतिशत तक ओवरलोडिंग पर दोगुना टोल और 40 प्रतिशत से ज्यादा ओवरलोडिंग पर चार गुना टोल वसूला जाएगा। ओवरलोड वाहनों की पहचान टोल प्लाजा पर लगे वजन मापने वाले सिस्टम से की जाएगी। अतिरिक्त शुल्क फास्टेग, यूपीआई या अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान करना होगा।

एआईएमजीटीए ने स्पष्ट रूप से कहा कि ओवरलोडिंग सड़क सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। एसोसिएशन लंबे समय से ओवरलोडिंग का विरोध कर रही है। भारत में हर साल लगभग 1.5 लाख से ज्यादा लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें ओवरलोडिंग एक प्रमुख कारण है। ओवरलोडिंग से वाहन की ब्रेकिंग क्षमता कम हो जाती है, संतुलन बिगड़ जाता है, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होते हैं तथा अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की जान को खतरा बढ़ जाता है।

एसोसिएशन की सबसे बड़ी आपत्ति इस बात पर है कि नया नियम ओवरलोड वाहनों को केवल अतिरिक्त शुल्क भरने के बाद आगे जाने की अनुमति दे रहा है। यह व्यवस्था वास्तविक रोकथाम के बजाय ‘पैसे देकर चलो’ की मानसिकता को बढ़ावा दे रही है। इससे सड़क सुरक्षा का उद्देश्य कमजोर पड़ रहा है।

इसके अलावा, यह नियम केवल राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू होता है। इसके अलावा क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा अलग से जुर्माना भी लगाया जाता है। इससे ट्रांसपोर्टरों पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है, जबकि समस्या का असली समाधान नहीं हो रहा है।

एआईएमजीटीए का मानना है कि केवल दंड लगाना काफी नहीं है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि ओवरलोड वाहन पकड़े जाने पर तुरंत उसका अतिरिक्त माल उतरवाकर ही आगे जाने की अनुमति दी जाए। टोल प्लाजा के अलावा अन्य जगहों पर भी सख्त निगरानी हो। सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय और रियल-टाइम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। नीति को दंड आधारित बनाने की बजाय रोकथाम आधारित बनाया जाए।

एसोसिएशन ने साफ कहा कि राजस्व बढ़ाने के नाम पर सड़क सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। जब तक ओवरलोडिंग को वास्तव में रोका नहीं जाएगा, तब तक सुरक्षित सड़कों का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता।

एआईएमजीटीए ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि इस नए नियम की तुरंत समीक्षा की जाए और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सख्त तथा प्रभावी उपाय लागू किए जाएं, ताकि देश में सुरक्षित और जिम्मेदार परिवहन व्यवस्था स्थापित हो सके।

–आईएएनएस

डीकेपी/

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