China Turkey Pakistan Military Airlift 60 Hours : पड़ोसी देश पाकिस्तान में अचानक बढ़ी संदिग्ध सैन्य गतिविधियों ने भारतीय रक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। खुफिया जानकारियों के अनुसार, चीन और तुर्की के भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान लगभग 60 घंटे तक पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेसों पर उतरते और उड़ान भरते रहे।
रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस और कराची के मसरूर एयरबेस पर इन विमानों की आवाजाही सबसे ज्यादा देखी गई। मीडिया में इस 60 घंटे लंबे गुप्त ऑपरेशन में ड्रोन और आधुनिक सैन्य साजो-सामान की बड़ी खेप एयरलिफ्ट किए जाने की खबर है, जिसके बाद भारतीय सीमाओं पर निगरानी कड़ी कर दी गई है।
चीन और तुर्की के साथ गहराता रक्षा गठजोड़
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के सैन्य जहाजों का यह लगातार मूवमेंट पाकिस्तान को रक्षा सामग्री, ड्रोन और एयर डिफेंस उपकरणों की सप्लाई के तहत हुआ है। पाकिस्तान अपनी सैन्य जरूरतों के लिए लंबे समय से बीजिंग पर निर्भर रहा है।
बीते साल ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के दौरान भारत-पाक झड़प के बाद यह साझेदारी और मजबूत हुई है, जिसमें चीन ने पाकिस्तान को सीधे तौर पर तकनीकी सहायता देने की बात कबूल की थी। अब इसमें तुर्की की एंट्री ने रणनीतिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है।
‘मक्का पैक्ट’ के बाद भारत के लिए बढ़ी चुनौतियां
हाल ही में 7 अगस्त को तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच ‘मक्का पैक्ट’ नामक एक संयुक्त रक्षा समझौता हुआ है। इसके तहत किसी एक देश पर सैन्य हमला होने की स्थिति में तीनों देश मिलकर उसका जवाब देंगे।
अब इस त्रिकोणीय रक्षा तंत्र में चीन का सीधा दखल और पाकिस्तान के भीतर भारी मात्रा में सैन्य साजो-सामान का उतरना क्षेत्र की शांति के लिए बड़ा सवाल खड़ा करता है। भारतीय रक्षा विशेषज्ञ इसे सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर कूटनीतिक और सैन्य चुनौती मान रहे हैं।
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