परमाणु रेडिएशन से बचाएगा स्वदेशी सीमेंट मोर्टार, आईआईटी ने विकसित किया नया तरीका

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नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। परमाणु बिजली घरों से किसी भी स्थिति में परमाणु रेडिएशन का खतरा न हो इसके लिए भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं ने एक विशेष प्रकार का सीमेंट मोर्टार विकसित किया है। भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह एक ऐसा विशेष सीमेंट मोर्टार है, जो न केवल निर्माण को लोहे जैसी मजबूती देगा, बल्कि जानलेवा परमाणु रेडिएशन को रोकने में भी सक्षम होगा। आईआईटी गुवाहाटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने सीमेंट में चार खास तरह के सूक्ष्म कण मिलाकर इसे ‘सुपर मोर्टार’ में बदल दिया है। चेर्नोबिल और फुकुशिमा जैसी बड़ी परमाणु आपदाओं से सबक लेते…

नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। परमाणु बिजली घरों से किसी भी स्थिति में परमाणु रेडिएशन का खतरा न हो इसके लिए भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं ने एक विशेष प्रकार का सीमेंट मोर्टार विकसित किया है।

भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह एक ऐसा विशेष सीमेंट मोर्टार है, जो न केवल निर्माण को लोहे जैसी मजबूती देगा, बल्कि जानलेवा परमाणु रेडिएशन को रोकने में भी सक्षम होगा।

आईआईटी गुवाहाटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने सीमेंट में चार खास तरह के सूक्ष्म कण मिलाकर इसे ‘सुपर मोर्टार’ में बदल दिया है। चेर्नोबिल और फुकुशिमा जैसी बड़ी परमाणु आपदाओं से सबक लेते हुए, वैज्ञानिकों का मुख्य फोकस ऐसी दीवारें बनाने पर था, जो भूकंप या विस्फोट जैसी चरम स्थितियों में भी रेडिएशन का रिसाव न होने दें।

आईआईटी के शोधकर्ताओं ने इन चार महत्वपूर्ण कणों का इस्तेमाल कर सीमेंट के मिश्रण को बेहद उन्नत बनाया है। इसमें बोरॉन ऑक्साइड मिलाया गया जिसने इसने रेडिएशन से सुरक्षा को कई गुना बढ़ा दिया। वहीं लेड ऑक्साइड मिलाने से यह मोर्टार काफी घना और मजबूत हो गया। इसमें टंगस्टन ऑक्साइड भी शामिल किया गया है। इसने दरारों को रोकने की क्षमता बढ़ाई और एक साथ कई तरह के रेडिएशन को रोकने में मदद की।

वहीं, इसमें शामिल किया गया बिस्मथ ऑक्साइड भी रेडिएशन अवरोधक के रूप में प्रभावी पाया गया। इस रिसर्च पर आईआईटी गुवाहाटी के प्रो. हृषिकेश शर्मा का कहना है, “हमारा लक्ष्य ऐसी अगली पीढ़ी की सामग्री तैयार करना है, जो भीषण गर्मी और रेडिएशन के बीच भी चट्टान की तरह खड़ी रहे।” गौरतलब है कि यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल मटेरियल्स एंड स्ट्रक्चर्स में प्रकाशित हुआ है। डॉ. हृषिकेश शर्मा और उनके छात्र संचित सक्सेना के साथ इसमें सीएसआईआर-रुड़की के डॉ. सुमन कुमार का भी अहम योगदान है।

अब वैज्ञानिक इस मोर्टार का बड़े पैमाने पर कंक्रीट के साथ परीक्षण करने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले समय में इसका उपयोग न्यूक्लियर रिएक्टरों, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और अस्पतालों के एक्स-रे, कैंसर थेरेपी रूम को सुरक्षित बनाने में किया जा सकेगा। टीम अब परमाणु ऊर्जा एजेंसियों और बड़ी निर्माण कंपनियों के साथ मिलकर इसे जमीन पर उतारने की योजना बना रही है।

आईआईटी का कहना है कि निर्माण कार्य में उपयोग होने वाला यह सीमेंट मोर्टार परमाणु रेडिएशन के खतरे को रोकने में सक्षम है। इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य परमाणु संयंत्रों को रेडिएशन-सुरक्षित बनाना है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि इस उन्नत मोर्टार से निर्मित कंक्रीट रेडिएशन रिसाव के जोखिम को कम करने में सक्षम है।

इससे परमाणु रिएक्टरों और अन्य विकिरण-संवेदनशील सुविधाओं जैसे स्थानों में समग्र सुरक्षा में सुधार होता है। इससे उन क्षेत्रों में अधिक विश्वसनीय सुरक्षात्मक दीवारें और संरचनाएं बनाने में मदद मिल सकती है, जहां रेडिएशन जोखिम को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। जैसे-जैसे दुनिया बढ़ती बिजली की मांग और जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा के विस्तार की ओर बढ़ रही है, परमाणु बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और स्थायित्व और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

इस चुनौती का समाधान करने के लिए, आईआईटी गुवाहाटी की शोध टीम ने सीमेंट मोर्टार में चार प्रकार के सूक्ष्म कणों को मिलाकर उसे संशोधित किया है। शोध के अगले चरणों के बारे में बात करते हुए, प्रोफेसर शर्मा ने आगे कहा,“अब हम विकसित सीमेंट मोर्टार को पूर्ण कंक्रीट मिश्रण डिजाइन में विस्तारित करने पर काम चल रहा है।

विकसित मोर्टार को शामिल करने वाले प्रबलित कंक्रीट तत्वों का संरचनात्मक स्तर पर परीक्षण करने की योजना हैं। हम विकसित सीमेंट मोर्टार की यांत्रिक शक्ति, कार्यक्षमता, स्थायित्व और विकिरण परिरक्षण प्रदर्शन के बीच आदर्श संतुलन प्राप्त करने के लिए सूक्ष्म कणों की मात्रा को अनुकूलित करने पर भी काम कर रहे हैं।”

–आईएएनएस

जीसीबी/डीके

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