नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। चीन पाकिस्तान की वायुसेना को नई शक्ल देने में लगा है, वहीं भारतीय वायुसेना ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक साथ चीन और पाकिस्तान के सामने अपनी ताकत दिखा चुकी है। उस समय पाकिस्तान के चीनी एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय हमलों के सामने बेकार साबित हुए थे।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी एयर कमांड के सभी एयरबेस सक्रिय थे। इन्हीं में से एक फ्रंटलाइन एयरबेस का भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा हालातों का जायजा लिया और तैयारियों की समीक्षा की।
दौरे के दौरान वायुसेना प्रमुख ने इसी फ्रंटलाइन एयरबेस से मिग-29 अपग्रेड फाइटर जेट में उड़ान भी भरी। उड़ान से पहले उन्हें ऑपरेशनल फ्लाइंग मिशन के बारे में ब्रीफ किया गया। लगभग 45 मिनट की इस सॉर्टी में एयर चीफ स्वयं मिग-29 अपग्रेड उड़ा रहे थे। इस फॉर्मेशन को फ्लाइट लेफ्टिनेंट परमिंदर सिंह लीड कर रहे थे।
मिग-29 अपग्रेड स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन शिव कुमार पोहरे ने स्क्वाड्रन के गौरवशाली इतिहास और मौजूदा वायुसेना प्रमुख से इसके संबंधों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह स्क्वाड्रन 1963 में मिग-21 टाइप-74 के साथ स्थापित किया गया था और यह देश का पहला सुपरसोनिक फाइटर स्क्वाड्रन था। बाद में मिग-21 को हटाकर इसमें मिग-29 को शामिल किया गया।
ग्रुप कैप्टन शिव कुमार पोहरे ने कहा कि इस साल यह स्क्वाड्रन अपने स्थापना के 63 वर्ष पूरे कर रहा है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह अपने करियर के शुरुआती दिनों में इसी स्क्वाड्रन में एक युवा अधिकारी के रूप में उड़ान भर चुके हैं। मिग-29 के अपग्रेड प्रोग्राम में भी उनकी अहम भूमिका रही है।
साथ ही इसी स्क्वाड्रन के मिग-21 ने 1971 के युद्ध के दौरान ढाका के गवर्नर हाउस पर स्ट्राइक कर इतिहास रचा था।
भारतीय वायुसेना में मिग-29 को 1987 में शामिल किया गया था। इसे रफाल और मिराज-2000 की तरह इमरजेंसी खरीद के तहत लिया गया था, क्योंकि उस समय पाकिस्तान अमेरिका से उस दौर का सबसे आधुनिक फाइटर जेट एफ-16 हासिल कर रहा था।
फिलहाल, भारतीय वायुसेना के पास मिग-29 अपग्रेड के तीन स्क्वाड्रन मौजूद हैं। मिग-29 को क्लोज प्रोटेक्शन इंटरसेप्टर और एयर डिफेंस एयरक्राफ्ट माना जाता है, जो हवाई मुकाबले में दुश्मन के जेट को इंटरसेप्ट करने में बेहद माहिर है।
हाल के वर्षों में इसे नई तकनीकों के साथ अपग्रेड किया गया है। अब मिग-29 लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है और एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग भी कर सकता है। इसके लिए इसमें रीफ्यूलिंग प्रोब जोड़ा गया है। साथ ही इसके रडार और एवियोनिक्स को भी पूरी तरह आधुनिक बनाया गया है।
इसकी अधिकतम रफ्तार 2.25 मैक, यानी लगभग 2,400 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें दागने में सक्षम है। कारगिल युद्ध के दौरान भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था, जहां इसे कॉम्बैट एयर पेट्रोल मिशनों और बीवीआर मिसाइलों के साथ तैनात किया गया था।
उरी हमले के बाद जब भारत की संभावित जवाबी कार्रवाई को लेकर तनाव बढ़ा, तब पाकिस्तान एयरफोर्स ने कई बार भारतीय सीमा के करीब अपने फाइटर जेट उड़ाए। ऐसे में भारतीय वायुसेना ने जवाबी तैयारी के तहत कई बार मिग-29 को स्क्रैम्बल किया।
पुलवामा हमले के बाद की गई बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान जब भारतीय वायुसेना का फाइटर पैकेज मिशन पर भेजा गया, तब उस फॉर्मेशन में मिग-29 भी शामिल थे। इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर में भी इस लड़ाकू विमान ने अपनी क्षमता का भरपूर प्रदर्शन किया।
–आईएएनएस
डीकेपी/
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