PM Modi High Level Meeting Today: खाड़ी देशों में जारी जंग के बीच भारत में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। इसी बीच PM मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा में संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया संकट पर सरकार ने अपनी तैयारियों के बारे में बताया था। आज भारत सरकार ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा के लिए शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बता दें कि केंद्र ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विशिष्ट क्षेत्रों, जिनमें तेल, गैस, उर्वरक, आपूर्ति श्रृंखला और मुद्रास्फीति शामिल हैं, पर ईरान युद्ध के प्रभावों से निपटने के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों के सात सशक्त समूहों का गठन किया है।
PM Modi High Level Meeting Today: PM मोदी की हाई लेवल मीटिंग

PM मोदी की हाई लेवल मीटिंग में आज कई बड़े मंत्री शामिल होंगे और माना जा रहा है कि इस बैठक में पेट्रोलियम, कच्चे तेल, ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्रों पर जंग के प्रभाव की चर्चा होगी। इस मीटिंग के बाद सरकार का मुख्य फोकस देश में बिना किसी रुकावट के तेल-गैस की सप्लाई को सुनिश्चित करना है। इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों और भारत पर उनके संभावित प्रभाव के बारे में सदस्यों को जानकारी दी। उन्होंने स्थिति को चिंताजनक बताया था।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की बैठक
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से उत्पन्न बढ़ती चुनौतियों के जवाब में, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान देश भर में उर्वरक आपूर्ति और आवंटन की समीक्षा करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाने वाले हैं। बैठक में कृषि को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों का आकलन करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, विशेष रूप से उभरती वैश्विक अनिश्चितताओं और कृषि क्षेत्र पर उनके संभावित प्रभावों के आलोक में। इसका प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खाड़ी देशों में जारी जंग के बाद भी पूरे देश में उर्वरकों की आपूर्ति स्थिर और समान बनी रहे।
PM Modi High Level Meeting Today: पश्चिम एशिया में जारी जंग

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिससे होर्मुज से होकर गुजरने वाले व्यापार मार्ग बाधित हो गए हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या समेत कई टॉप अधिकारी मारे गए है। जिसके बाद तनाव और बढ़ गया। इसके जवाब में, ईरान ने कई खाड़ी देशों में इजरायली और अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाया, जिससे जलमार्ग में और अधिक व्यवधान उत्पन्न हुआ और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक स्थिरता भी प्रभावित हुई।
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