प्रियांक खड़गे ने आरएसएस पर साधा निशाना, पारदर्शिता और कानूनी रजिस्ट्रेशन की मांग

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बेंगलुरु, 16 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा पोस्ट लिखकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उसके प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरएसएस को सांस्कृतिक संगठन मानने के साथ ही उसकी राजनीतिक जवाबदेही, पारदर्शिता और कानूनी रजिस्ट्रेशन की मांग दोहराई। प्रियांक खड़गे ने स्पष्ट किया कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का जो वीडियो उनके पत्र के जवाब के रूप में वायरल हो रहा है, वह गलत है। उन्होंने बताया, “मैंने पत्र 15 जून को भेजा था, जबकि आरएसएस प्रमुख की वह…

बेंगलुरु, 16 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा पोस्ट लिखकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उसके प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरएसएस को सांस्कृतिक संगठन मानने के साथ ही उसकी राजनीतिक जवाबदेही, पारदर्शिता और कानूनी रजिस्ट्रेशन की मांग दोहराई।

प्रियांक खड़गे ने स्पष्ट किया कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का जो वीडियो उनके पत्र के जवाब के रूप में वायरल हो रहा है, वह गलत है। उन्होंने बताया, “मैंने पत्र 15 जून को भेजा था, जबकि आरएसएस प्रमुख की वह बातचीत 13-14 जून की थी।”

खड़गे ने लिखा कि आरएसएस को सांस्कृतिक संगठन होने का पूरा अधिकार है, लेकिन एक ही समय में व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि उनका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है और इसलिए जनता के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा खुद आरएसएस को अपना वैचारिक जनक मानती है।

उन्होंने आरएसएस के विस्तार पर सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन देश-विदेश में 2500 से ज्यादा जुड़े संगठनों के नेटवर्क के जरिए चंदा प्राप्त करता है और विभिन्न राजधानियों में अपने मुख्यालय चलाता है। आरएसएस प्रमुख को एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइसेंस प्रोटोकॉल मिलता है और अन्य पदाधिकारियों को भी टैक्सपेयर्स के पैसे से सुरक्षा दी जाती है।

प्रियांक खड़गे ने जोर देकर कहा, “जनता को यह जानने का हक है कि क्या आरएसएस उन कानूनी मानकों का पालन करता है, जिनकी उम्मीद बाकी सभी संगठनों से की जाती है। कानून के तहत औपचारिक मान्यता मिलने से यह विरोधाभास हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।”

उन्होंने आरएसएस के इस तर्क को खारिज किया कि किसी धर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं होता, इसलिए आरएसएस को भी रजिस्टर करने की जरूरत नहीं है। खड़गे ने कहा कि आरएसएस किसी धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करता और मात्र 100 साल पुराना संगठन है।

अंत में उन्होंने लिखा, “मुझे आरएसएस की किसी भी सांस्कृतिक, सामाजिक या कानूनी गतिविधि से आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए। सबसे चिंताजनक बात भागवत का यह कहना कि आरएसएस किसी सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। संवैधानिक लोकतंत्र में किसी भी संस्था को विशेषाधिकार नहीं मिलता। अहंकार छोड़िए, कानून का पालन कीजिए।”

–आईएएनएस

एससीएच/एएस

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