Rahul Gandhi on MM Naravane: लोकसभा के बजट सत्र के चौथे दिन नेता विपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। जैसे ही राहुल गांधी ने चीन की घुसपैठ का मुद्दा उठाया, सत्ता पक्ष के सांसदों ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने अपने भाषण में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की एक किताब का हवाला दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, वह अभी तक प्रकाशित ही नहीं हुई है, इसलिए सदन में उसके आधार पर बात करना गलत है। हंगामे के कारण करीब 45 मिनट तक कार्यवाही बाधित रही और अंत में सदन को स्थगित करना पड़ा।

Rahul Gandhi on MM Naravane: डोकलाम में चीनी घुसपैठ का मुद्दा
राहुल गांधी ने अपने भाषण में डोकलाम क्षेत्र में चीनी सैनिकों की गतिविधियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां चीनी टैंक भारतीय सैनिकों के बेहद करीब आ गए थे। इसके लिए उन्होंने जनरल नरवणे की किताब का हवाला दिया। जैसे ही यह बात कही गई, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह खड़े हो गए और उन्होंने सवाल उठाया कि जिस किताब की बात हो रही है, क्या वह आधिकारिक रूप से प्रकाशित है या नहीं। उन्होंने इसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए। वहीं राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस किताब को छपने से रोक रही है।
Four Stars of Destiny: किताब का नाम और स्थिति
राहुल गांधी जिस किताब का जिक्र कर रहे थे, उसका नाम है ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’। यह किताब पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे ने लिखी है और इसके कुछ अंश एक मैगजीन में प्रकाशित हुए थे। हालांकि यह किताब अभी तक पूरी तरह से प्रकाशित नहीं हो पाई है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय से अनुमति जरूरी है, जो अब तक नहीं मिल सकी है।

Parliament Debate Today: क्यों अटकी हुई है किताब की अनुमति?
पूर्व सेना प्रमुख ने अक्टूबर 2025 में एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने किताब लिखकर प्रकाशक को सौंप दी थी। इसके बाद प्रकाशक ने इसे रक्षा मंत्रालय की समीक्षा के लिए भेजा। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से अधिक समय से यह किताब मंत्रालय के पास जांच के लिए है। प्रकाशक और मंत्रालय के बीच लगातार बातचीत चल रही है। अब फैसला रक्षा मंत्रालय को ही लेना है कि किताब को मंजूरी दी जाए या नहीं।
Lok Sabha Disruption: गलवान संघर्ष और अग्निपथ योजना का जिक्र
इस किताब में साल 2020 के गलवान संघर्ष से जुड़ी अहम घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इसमें एक बातचीत का भी जिक्र है, जिसमें रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री के हवाले से कहा था कि सेना हालात के अनुसार फैसला ले। इसके अलावा किताब में अग्निपथ भर्ती योजना को लेकर भी टिप्पणी की गई है। जनरल नरवणे के अनुसार सेना ने ज्यादा जवानों को लंबे समय तक रखने का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने केवल 25 प्रतिशत जवानों को ही स्थायी रखने का फैसला किया। उन्होंने यह भी बताया कि शुरू में तय वेतन कम माना गया था, जिसे बाद में बढ़ाया गया। सरकार ने हालांकि इन दावों को गलत बताया है।

जनवरी 2024 से लटकी हुई प्रक्रिया
रक्षा मंत्रालय ने जनवरी 2024 में इस किताब की समीक्षा शुरू की थी और प्रकाशक को इसके अंश सार्वजनिक न करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद अमेजन जैसी वेबसाइटों पर शुरू हुए प्री-ऑर्डर भी रद्द कर दिए गए।


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