नई दिल्ली : कावेरी नदी पर बांध का निर्माण सहित विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण बुधवार को राज्यसभा की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिये स्थगित कर दी गयी। सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाये। इसके बाद उन्होंने हंगामे के कारण सदन की गरिमा और प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल असर पड़ने का हवाला देते हुए सभी सदस्यों से कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सकारात्मक योगदान की अपील की।
नायडू ने गत 11 दिसंबर से शीतकालीन सत्र शुरु होने के बाद अब तक चक्रवाती तूफान से हुये नुकसान, कृषि संकट सहित विभिन्न अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाने पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि सदन में कार्यवाही नहीं हो पाने के कारण संसद की प्रतिष्ठा दांव पर है। नायडू द्वारा शून्य काल के दौरान चर्चा शुरु कराने के साथ ही सदन में विभिन्न दलों के नेताओं ने नारेबाजी शुरु कर दी। अन्नाद्रमुक के सदस्य कावेरी नदी पर बांध के निर्माण का विरोध करते हुए आसन के समीप आ गए।
हंगामे के बीच ही तृणमूल कांग्रेस के शांतनु सेन, नदीमुल हक और राजद के मनोज झा ने लोक महत्व के अलग अलग मुद्दे उठाए। शोरगुल नहीं थमने पर नायडू ने सदन की बैठक 11 बजकर 25 मिनट पर 15 मिनट के लिये स्थगित कर दी। एक बार के स्थगन के बाद बैठक पुन: शुरु होते ही उपसभापति हरिवंश ने कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिये स्थगित कर दी।


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