कोरोना संकट के मद्देनजर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को रेपो रेट में 40 बेसिस पॉइंट कटौती का ऐलान किया है। भारतीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने में मदद के उद्देश्य से यह कटौती की गई है। रेपो रेट 4.4 से घटकर अब 4.0 फीसद हो गई है। वहीं रिवर्स रेपो रेट घटाकर 3.35 फीसदी कर दी गई है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि देश में इस बार मानसून, विनिर्माण, कृषि उपज, कच्चे तेल, धातु आदि की आने वाले दिनों में स्थिति पर भी विस्तार से विचार विमर्श किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन दिन में समिति ने कोरोना संकट की वजह से बने घरेलू और वैश्विक माहौल की समीक्षा की।
आरबीआई ने टर्म लोन मोरटोरियम 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया है। पहले यह 31 मई तक के लिए था। तीन महीने और बढ़ने से अब 6 महीने के मोरटोरियम की सुविधा हो गई है। यानी इन 6 महीने अगर आप अपनी EMI नहीं चुकाते हैं तो आपका लोन डिफॉल्ट या NPA कैटेगरी में नहीं माना जाएगा। इससे पहले एक मार्च 2020 से 31 मई 2020 के बीच सभी टर्म लोन के भुगतान पर 3 महीनों की मोहलत दी थी।
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गवर्नर शक्तिकांत दास ने देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की ग्रोथ रेट 2020-21 में निराशाजनक रहने की संभावना जताई। आरबीआई के अनुसार चालू वित्त वर्ष में GDP ग्रोथ रेट नकारात्मक रह सकता है। सिडबी को 15000 करोड़ रुपये के इस्तेमाल के लिए 90 दिनों का अतिरिक्त समय मिलेगा। एक्सपोर्ट क्रेडिट समय 12 महीने से बढाकर 15 माह किया जा रहा है।
गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि समिति ने कोरोना वायरस की वजह से देश और दुनिया के हालात की समीक्षा की है। लॉकडाउन की वजह से महंगाई बढ़ने की आशंका है। अनाजों की आपूर्ति एफसीआई से बढ़ानी चाहिए। देश में रबी की फसल अच्छी हुई है। जबकि बेहतर मॉनसून और कृषि से काफी उम्मीदे है।
उन्होंने कहा, कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण बेहद अनिश्चित है और दालों की बढ़ी कीमतें चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कीमतों में नरमी लाने के लिए आयात शुल्क की समीक्षा करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष की पहली छमाही में प्रमुख मुद्रास्फीति की दर स्थिर रह सकती है और दूसरी छमाही में इसमें कमी आ सकती है।
उनके मुताबिक चालू वित्त वर्ष की तीसरी या चौथी तिमाही में मु्द्रास्फीति की दर चार प्रतिशत से नीचे आ सकती है। इसके अलावा दास ने कहा कि महामारी के बीच आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने से सरकार का राजस्व बहुत अधिक प्रभावित हुआ है।


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