नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। राजस्थान की समृद्ध लोक संगीत परंपरा को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने वाले प्रसिद्ध लोक गायक एवं प्लेबैक सिंगर स्वरूप खान आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। स्वरूप खान का जन्म 6 अगस्त 1991 को राजस्थान के जैसलमेर में हुआ था।
जैसलमेर जिले के बइया (बरिसियाला) गांव के रहने वाले स्वरूप खान ने अपनी अनूठी आवाज और राजस्थानी लोक संगीत की मिठास से लाखों श्रोताओं के दिलों में खास जगह बनाई है। वे मांगणियार समुदाय से संबंध रखते हैं, जो सदियों से राजस्थान की लोक-संगीत परंपरा को जीवंत बनाए हुए है। इसी सांस्कृतिक विरासत ने उनके संगीत को एक अलग पहचान दी है।
स्वरूप खान का जन्म जैसलमेर के एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां संगीत केवल कला नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा रहा है। बचपन से ही उन्हें लोकगीतों, सूफी संगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बीच रहने का अवसर मिला। परिवार के संगीत वातावरण ने उनकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कम उम्र में ही उन्होंने लोक गायन की बारीकियां सीख लीं और अपनी विशिष्ट शैली विकसित कर ली।
देशभर में स्वरूप खान को वर्ष 2010 में टीवी के लोकप्रिय रियलिटी शो ‘इंडियन आइडल सीजन 5’ से पहचान मिली। इस मंच पर उनकी दमदार और अलग अंदाज की आवाज ने न केवल दर्शकों बल्कि संगीत जगत के दिग्गजों का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उनकी प्रस्तुति से प्रभावित होकर प्रसिद्ध संगीतकार बप्पी लहरी ने उन्हें बॉलीवुड में पहला बड़ा अवसर दिया। यहीं से उनके पेशेवर संगीत करियर ने नई उड़ान भरी और फिल्मी दुनिया के दरवाजे उनके लिए खुल गए।
बॉलीवुड में स्वरूप खान ने कई यादगार गीतों को अपनी आवाज दी। आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘पीके’ का लोकप्रिय गीत “थरकी छोकरो” उनकी सबसे चर्चित प्रस्तुतियों में शामिल है। इस गीत ने उनकी गायकी को देशभर में नई पहचान दिलाई। इसके बाद संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ के प्रसिद्ध गीत “घूमर” में श्रेया घोषाल के साथ उनकी आवाज ने श्रोताओं का दिल जीत लिया। इन गीतों के माध्यम से उन्होंने राजस्थानी लोक संगीत की मिठास को मुख्यधारा के बॉलीवुड संगीत से सफलतापूर्वक जोड़ा।
स्वरूप खान ने अपने संगीत सफर में कई प्रतिष्ठित संगीतकारों और फिल्मकारों के साथ काम किया है। इनमें संजय लीला भंसाली, अमित त्रिवेदी, शंकर महादेवन और राजकुमार हिरानी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। उनकी गायकी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसमें राजस्थान की मिट्टी की खुशबू, लोक संस्कृति की आत्मा और आधुनिक संगीत का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। यही कारण है कि उनके गीत केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब सराहे जाते हैं।
देश-विदेश में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगीत समारोहों और विशेष आयोजनों में स्वरूप खान की प्रस्तुतियां दर्शकों को राजस्थानी लोक संस्कृति से जोड़ने का काम करती हैं। उनकी आवाज रेगिस्तान की संस्कृति, लोक परंपरा और सूफियाना अंदाज का जीवंत अहसास कराती है। वे अपनी कला के माध्यम से नई पीढ़ी को भी राजस्थान की समृद्ध लोक-संगीत विरासत से परिचित करा रहे हैं।
स्वरूप खान अब केवल एक सफल प्लेबैक और लोक गायक नहीं बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान के सशक्त प्रतिनिधि बन चुके हैं। उन्होंने अपनी मेहनत, समर्पण और प्रतिभा के दम पर यह साबित किया है कि लोक संगीत की जड़ें जितनी मजबूत होती हैं, उसकी गूंज उतनी ही दूर तक पहुंचती है। उनकी सफलता न केवल जैसलमेर और राजस्थान बल्कि पूरे देश के लोक कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
–आईएएनएस
एसएके/पीएम
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