नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। आज के दौर में हम सब एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहां जानकारी की कोई कमी नहीं है। मोबाइल खोलते ही स्वास्थ्य से जुड़ी हजारों सलाह हमारे सामने होती हैं। कभी कोई घरेलू नुस्खा वायरल होता है, तो कभी कोई नई दवा या डाइट ट्रेंड बन जाती है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सारी जानकारी सही होती है? क्या हम जो मान रहे हैं, वो सच में हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है? ऐसे में जरूरी है साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य की जानकारी।
साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य का मतलब है ऐसा स्वास्थ्य ज्ञान और इलाज जो वैज्ञानिक शोध, प्रमाण और ठोस तथ्यों पर आधारित हो। यानी जो बातें डॉक्टर, वैज्ञानिक और शोधकर्ता लंबे समय तक अध्ययन करके साबित करते हैं, वही हमारी सेहत के लिए सबसे भरोसेमंद होती हैं। इसलिए विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 का थीम भी इस बार कुछ ऐसा ही रखा गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की स्थापना की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हर साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकता वाले क्षेत्र को उजागर करने के लिए एक विषय का चयन किया जाता है। साल 2026 के लिए ‘स्वास्थ्य के लिए एकजुट। विज्ञान के साथ खड़े रहें’ थीम रखा गया है। यह वैज्ञानिक उपलब्धियों और साक्ष्यों को कार्रवाई में बदलने पर जोर देता है।
कई बार लोग सोशल मीडिया पर देखी हुई सलाह को तुरंत अपना लेते हैं, बिना ये जाने कि ये उनके शरीर के लिए सही है या नहीं। इसका नतीजा कभी-कभी उल्टा भी पड़ सकता है। वहीं दूसरी तरफ, जब हम साक्ष्य आधारित जानकारी पर भरोसा करते हैं, तो हम न सिर्फ सही इलाज चुनते हैं, बल्कि अपने शरीर को अनावश्यक जोखिम से भी बचाते हैं।
आज की सबसे बड़ी जरूरत यही है कि हम सुनी-सुनाई बातों से आगे बढ़ें और तथ्यों पर भरोसा करें। उदाहरण के लिए, टीकाकरण को ही ले लीजिए। कई बार इसके बारे में गलतफहमियां फैलाई जाती हैं, लेकिन वैज्ञानिक शोध साफ बताते हैं कि टीके लाखों जिंदगियां बचाते हैं।
सिर्फ इलाज ही नहीं, हमारी रोजमर्रा की आदतों में भी साक्ष्य आधारित सोच जरूरी है। संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना ये सब बातें वैज्ञानिक रूप से साबित हैं कि ये हमें स्वस्थ रखते हैं। लेकिन फिर भी हम कई बार शॉर्टकट ढूंढते हैं जल्दी वजन घटाने की दवाएं, बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट्स या फैड डाइट्स। ये सब चीजें आकर्षक जरूर लगती हैं, लेकिन हमेशा सुरक्षित नहीं होतीं।
इसके अलावा, हर व्यक्ति अलग होता है। जो चीज एक व्यक्ति के लिए फायदेमंद है, जरूरी नहीं कि वही दूसरे के लिए भी सही हो। इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना और अपनी जरूरत के हिसाब से निर्णय लेना बेहद जरूरी है। इंटरनेट से जानकारी मिल सकती है, लेकिन सही मार्गदर्शन एक विशेषज्ञ ही दे सकता है। इसलिए अगर हम आज सही जानकारी और वैज्ञानिक सोच अपनाते हैं, तो हम भविष्य में होने वाली कई बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं।
इसके अलावा, साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य समाज के स्तर पर भी बहुत महत्वपूर्ण है। जब पूरी जनता सही जानकारी पर भरोसा करती है, तो बड़े स्तर पर स्वास्थ्य संकटों से निपटना आसान हो जाता है। महामारी जैसी परिस्थितियों में हमने देखा है कि जहां लोग विज्ञान और साक्ष्य पर भरोसा करते हैं, वहां हालात को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
–आईएएनएस
पीआईएम/एएस
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



