मुंबई, 3 जुलाई (आईएएनएस)। मुंबई के साकीनाका इलाके में खैरानी रोड पर खुले मैनहोल में गिरने से 60 वर्षीय असलम शेख की मौत के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। भारी बारिश और जलभराव के बीच हुई इस दर्दनाक घटना ने नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने घटना पर दुख जताते हुए कहा, “इसके लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। लेकिन मैं बस इतना कहूंगा कि पिछले 25 सालों में मुंबई नगर निगम में शिवसेना (यूबीटी) ने जो गड़बड़झाला किया है, उसे ठीक करने में हमें कुछ समय लगेगा।”
उन्होंने कहा, “मैनहोल में गिरने से जिस व्यक्ति की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हुई, उसके मामले में हम एफआईआर दर्ज कराएंगे। मैंने कल सदन में यह मांग रखी थी और सरकार ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।”
शिवसेना विधायक दीपक वसंत केसरकर ने भी घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “यह बहुत दुखद घटना है। जिम्मेदार सभी लोगों, जिनमें संबंधित अधिकारी और ठेकेदार शामिल हैं, के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्हें कानून के तहत सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।”
शिवसेना विधायक मुरजी पटेल ने कहा, “मैंने कल रात म्युनिसिपल कमिश्नर से बात की। बातचीत के बाद, बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) कमिश्नर ने सभी संबंधित अधिकारियों को सड़कों का निरीक्षण करने, मैनहोल के ढक्कन और स्टॉर्मवॉटर ड्रेन की जांच करने और व्यापक सर्वे करने का निर्देश दिया। पिछले दो दिनों में जो दुखद घटना हुई, वह कभी नहीं होनी चाहिए थी।”
इस दौरान शिवसेना नेता मनीषा कयांडे ने नगर प्रशासन के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “सड़कों पर मौजूद अधिकारी – चाहे वे मेंटेनेंस अधिकारी हों, ट्री अथॉरिटी अधिकारी हों, फुटपाथ मेंटेनेंस अधिकारी हों या पेड़-पौधों के रखरखाव वाले अधिकारी-क्या कर रहे हैं? यह उनकी जिम्मेदारी है। कई अधिकारी हफ्ता वसूली में व्यस्त हैं और अवैध निर्माण को रोकने में नाकाम रहे हैं।”
कांग्रेस विधायक असलम शेख ने कहा कि इस तरह की मरम्मत और सुरक्षा संबंधी काम मानसून से पहले पूरे हो जाने चाहिए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि पहली दुर्घटना के बाद भी प्रशासन ने जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए। उनके अनुसार, जिसकी भी लापरवाही से किसी व्यक्ति की जान गई है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के निर्देशों के बावजूद खुले मैनहोल को सुरक्षित नहीं बनाया गया।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद लोगों को बेहतर व्यवस्था की उम्मीद थी, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। उनके अनुसार, मुंबई जैसे महानगर में इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं।
वहीं, कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने मृतक के परिवार को दी गई आर्थिक सहायता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 10 लाख रुपये का मुआवजा पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक, परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये की सहायता मिलनी चाहिए ताकि उस राशि के ब्याज से परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके। उन्होंने मुंबई में जलनिकासी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कई इलाकों में बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती।
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने इसे पूरी तरह प्रशासनिक विफलता बताया। उन्होंने कहा, “यह प्रशासनिक विफलता है। मुंबई के ड्रेनेज सिस्टम के लिए रखे गए करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए हैं। दो लोगों की जान चली गई है, जिनमें एक 11 साल का बच्चा और एक 60 साल का बुजुर्ग शामिल है। महाराष्ट्र सरकार को दोनों पीड़ितों के परिवारों के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान करना चाहिए। मैंने दो लड़कियों को भी बाढ़ के कारण एक दुकान में फंसे हुए देखा और न तो पुलिस और न ही नगर प्रशासन समय पर उन तक पहुंचा। स्थानीय लोगों ने ही उन्हें बचाया। मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे नगर निगम विफल रहे हैं। सरकार को सख्त और तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि मॉनसून के अभी कुछ ही दिन बीते हैं और बारिश का मौसम अभी लगभग चार महीने रहेगा।”
–आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
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