सांस लेने में दिक्कत से ब्रोंकियल इन्फेक्शन तक, श्वसन क्रिया सुधारने में कपालभाति कारगर

Summary :

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। विश्व योग दिवस को कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। इस बीच भारत सरकार का आयुष मंत्रालय आए दिन नए -नए योगासनों के अभ्यास के साथ ही उनसे मिलने वाले फायदों के बारे में जानकारी दे रहे है। बढ़ते प्रदूषण, धूल और मौसम के तेज बदलाव के कारण आजकल सांस लेने में दिक्कत, साइनस, खांसी, जुकाम और ब्रोंकियल इन्फेक्शन जैसी श्वसन संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में मंत्रालय ने श्वसन क्रिया को मजबूत और स्वस्थ रखने के लिए प्राचीन योग क्रिया कपालभाति को अपनाने की सलाह दी है। कपालभाति एक शक्तिशाली प्राणायाम…

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। विश्व योग दिवस को कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। इस बीच भारत सरकार का आयुष मंत्रालय आए दिन नए -नए योगासनों के अभ्यास के साथ ही उनसे मिलने वाले फायदों के बारे में जानकारी दे रहे है। बढ़ते प्रदूषण, धूल और मौसम के तेज बदलाव के कारण आजकल सांस लेने में दिक्कत, साइनस, खांसी, जुकाम और ब्रोंकियल इन्फेक्शन जैसी श्वसन संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में मंत्रालय ने श्वसन क्रिया को मजबूत और स्वस्थ रखने के लिए प्राचीन योग क्रिया कपालभाति को अपनाने की सलाह दी है।

कपालभाति एक शक्तिशाली प्राणायाम है, जो फेफड़ों को साफ करने, सांस की नलियों को खोलने और पूरे श्वसन तंत्र को बेहतर बनाने में बेहद कारगर माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, हर दिन कपालभाति के कुछ सावधानीपूर्वक चक्र करने से सांस को ताजगी मिलती है, शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और श्वसन क्रिया मजबूत होती है। जिन लोगों को साइनस कंजेशन, लगातार खांसी, जुकाम, राइनाइटिस, साइनसाइटिस, अस्थमा या ब्रोंकियल इन्फेक्शन की शिकायत है, उनके लिए कपालभाति विशेष रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है।

यह क्रिया फेफड़ों से पुरानी हवा और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है, जिससे सांस लेने में आसानी होती है और संक्रमण का खतरा कम होता है।

कपालभाति करते समय तेजी से सांस छोड़नी पड़ती है, जबकि सांस लेना स्वाभाविक रूप से होता है। इससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, ऑक्सीजन का स्तर सुधरता है और श्वसन नलिकाओं में जमा बलगम साफ होता है। नियमित अभ्यास से सांस की नली की सूजन कम होती है और ब्रोंकियल इन्फेक्शन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि कपालभाति न सिर्फ श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है, बल्कि शरीर की अंदर से सफाई भी करती है। यह मस्तिष्क को तरोताजा रखती है और सुबह के समय इसे करने से पूरे दिन ऊर्जा बनी रहती है। ऐसे में एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि शुरुआत में कम चक्रों से अभ्यास शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं। कपालभाति हमेशा खाली पेट करें और अगर किसी को गंभीर बीमारी है, तो डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से ही अभ्यास करें।

–आईएएनएस

एमटी/पीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.