सुप्रीम कोर्ट के जज डीवाई चंद्रचूड़ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान एक वकील से कहा कि वह उनके पानी की एक बूंद के बिना रोजा रखने की क्षमता की बहुत तारीफ करते हैं। दरअसल, जज डीवाई चंद्रचूड़ एक मामले की सुनवाई कर रहे थे जिसके वकील ने दस्तावेज जमा करने के लिए कुछ समय मांगा और मामले की सुनवाई को रमजान के बाद सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।
बता दें कि जस्टिस चंद्रचूड़ 29 नवंबर, 2019 के एक विशेष अवकाश याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई कर रहे थे। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में हत्या के लिए दोषी ठहराए जाने वाले याचिकाकर्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हो रही थी जिसके लिए कुछ दस्तावेजों को जमा करने के लिए समय की जरूरत थी।
इसलिए याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से गुजारिश करते हुए कहा कि इस मामले की सुनवाई रमजान के बाद तक के लिए टाल दी जाए। इसके बाद, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को मामले के रिपोर्ट की कॉपी ले जाने और उसका निरीक्षण करने की अनुमति दी, और साथ ही वकील को रिपोर्ट के जवाब में एक हलफनामा दायर करने की अनुमति भी दी। कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि यह सब तीन सप्ताह के भीतर किया जाए और एसएलपी की सुनवाई को 10 मई, 2021 को सूचीबद्ध किया जाए।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, “मुझे खेद है। आपको सुबह इसके बारे में बताना चाहिए था और हम मामले को स्थगित कर सकते थे। कृपया जाएं और आराम करें। मैं पानी की एक बूंद के बिना भी पूरे दिन उपवास करने की क्षमता की प्रशंसा करता हूं।” रमजान के पाक महीने में मस्लिम धर्म के लोग रोज़ा रखते हैं। जिसमें वो पूरा दिन पानी की एक बूंद पीए बिना रहते हैं।


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