नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। एसआईआर की प्रक्रिया का विपक्षी नेताओं की ओर से विरोध किया जा रहा है। इसे लेकर नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।
छत्तीसगढ़ की राजनांदगांव से भाजपा सांसद संतोष पांडे ने कहा, “जहां तक एसआईआर की बात है, हमने पश्चिम बंगाल और बिहार में इसका असर देखा है। एसआईआर देशहित में है और जरूरी है। क्या घुसपैठियों को देश से बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए? क्या बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को इस देश में रहने दिया जाना चाहिए? इसका विरोध करना गलत है। रही बात उनकी जिनकी मौत हो गई है, या जिनके नाम जोड़े जाने हैं जैसे अगर दिल्ली का कोई व्यक्ति अब मुंबई में रह रहा है, तो क्या वहां उसका नाम नहीं जोड़ा जाना चाहिए? आखिर वे किस बात का विरोध कर रहे हैं।”
एसआईआर को लेकर विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग की आलोचना पर केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा, “2014 से पहले, वोटर लिस्ट में हेरफेर की जाती थी और कांग्रेस पार्टी इसी तरह चुनाव जीतती थी। राहुल गांधी का दावा है कि कांग्रेस की चुनावी हार एसआईआर और वोटर लिस्ट में हेरफेर का नतीजा है। भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले भी कांग्रेस पार्टी ने पश्चिम बंगाल और देश के कई अन्य राज्यों में सालों तक कोई चुनाव नहीं जीता था, लेकिन उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं कहा। केरल में राहुल गांधी ने कहा था कि पिनाराई विजयन को भ्रष्टाचार के लिए जेल जाना चाहिए। आज कांग्रेस पार्टी पिनाराई विजयन का बचाव कर रही है और उन्हें जेल जाने से बचा रही है।”
वहीं, कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा, “चुनाव आयोग का रवैया ऐसा ही रहा है। डेढ़ साल पहले राहुल गांधी ने उन्हें चेतावनी दी थी कि यह एसआईआर और वोटों की चोरी लोकतंत्र को खत्म कर देगी। फिर लोकतंत्र का क्या बचेगा? लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और यह सिलसिला चलता रहा।”
एसआईआर को लेकर राहुल गांधी की ओर से दिए गए बयान पर उदित राज ने कहा, “यह बिल्कुल सच है। जब एसआईआर के जरिए वोट हटाए जाते हैं, ईवीएम का गलत इस्तेमाल होता है, और चुनाव आयोग ‘फॉर्म 6’ में बदलाव करता है, जब अकेले बंगाल में ही 38 लाख वोटरों के नाम लिस्ट से हटाकर उन्हें वोट देने से रोक दिया जाता है, तो फिर डर किस बात का? वे चाहे भ्रष्टाचार करें या हिंसा का सहारा लें, वे जो चाहें कर सकते हैं क्योंकि वे जनता के वोट की ताकत से चुनकर नहीं आए हैं। यह सिस्टम की ताकत है। उन्होंने सिस्टम को अपने हाथों में ले लिया है।”
कांग्रेस नेता दानम नागेंद्र ने कहा, “पूरी दुनिया जानती है कि एसआईआर को लेकर एक बड़ी साजिश चल रही है। भारत में वोट देने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और चुनाव आयोग के पास किसी का भी मौलिक अधिकार छीनने का हक नहीं है। जहां भी चुनाव हुए हैं, चाहे बंगाल हो या कहीं और, जबसे राहुल गांधी ने एसआईआर के खिलाफ अभियान शुरू किया है, तब से दुनिया भर के लोगों ने, चाहे उनकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी हो, इसके खिलाफ आवाज उठाई है।”
सीपीआई(एमएल) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, “एसआईआर को तुरंत रोका जाना चाहिए; जिन 13 करोड़ वोटरों को हटाया गया है, उन्हें वापस शामिल किया जाना चाहिए और ज्ञानेश कुमार को हटाया जाना चाहिए। हमें उम्मीद है कि 30 तारीख तक इस पर कोई फैसला आ जाएगा। आने वाले दिनों में, न सिर्फ ‘इंडिया’ गठबंधन बल्कि भाजपा-विरोधी सभी पार्टियां, लोकतंत्र और संविधान के लिए काम करने वाले सिविल सोसाइटी के सदस्य और देश के वोटर एकजुट होकर एक बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करेंगे और जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हो जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे।”
–आईएएनएस
एसडी/पीएम
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