Election Commission : इन दिनों SIR की प्रक्रिया देशभर में अंतिम पड़ाव पर है, ऐसे में इस अभियान के बीच नया विवाद सामने आ गया है, यह विवाद चिंगारी में हवा जैसी है जिसे विपक्ष काफी समय से देने की कोशिश में है. बता दें आरोप चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मनमाने फैसले लेने पर है, जिसे कथित तौर पर लगाने वाले सह चुनाव आयुक्त हैं.
दरअसल, SIR की प्रक्रिया जून 2025 से बिहार से शुरू हुई थी, इसके बाद देशभर में यह अभियान चलाया गया. अपने शुरूआती समय से ही SIR पर विपक्ष हमलावर था. जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कई तीखे आरोप लगाए गए थे. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि 10 महीने में 14 बार संधू और जोशी ने औपचरिक तौर पर आपति जताई. उनका आरोप है कि जो फैसले लिए जा रहे हैं और जो आदेश चुनाव आयोग द्वारा दिए जा रहे हैं उसमें उन्हें संज्ञान में नहीं लिया जा रहा है.
क्या है आरोप?
बता दें यह खुलासा इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयुक्त डा. सुखबीर सिंह संधू और डा विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार अपनी आपत्तियां चुनाव आयोग व मुख्य चुने आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष दर्ज कराईं.
दोनों आयुक्तों ने वोटरों के नाम जोड़ने और डिलीट करने के मामले में उन्हें अँधेरे में रखने का सवाल भी उठाया था. इस खुलासे पर विपक्षी दल अब ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा मंगा है.
चुनाव आयोग की सफाई
इस मामले में इलेक्शन कमीशन ने अपनी तरफ से सफाई पेश की है. चुनाव आयोग के अनुसार वह हर दिन 10 आदेश जारी करता है. ECI के अनुसार फैसले बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं. सभी फैसलों में तीनों चुनाव आयुक्तों के फैसले होते हैं. यानी किसी भी चुनाव आयुक्त ने असहमति नहीं दर्ज कराई, उन्होंने बस कुछ बातें रखी थीं.
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