Supreme Court on Divorce Case: सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद पुराने और जटिल तलाक मामले में अहम फैसला सुनाया है। करीब 32 साल से चल रहे इस विवाद का अंत करते हुए अदालत ने पति-पत्नी को आपसी सहमति से अलग होने की अनुमति दे दी। यह मामला 1994 से लंबित था और इसमें कुल 61 अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे।
Supreme Court on Divorce Case: 32 साल पुराने विवाद का अंत

यह मामला लंबे समय से अदालतों में चल रहा था और दोनों पक्षों के बीच कई कानूनी विवाद खड़े हो गए थे। आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसका समाधान निकाला। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की पीठ ने सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की स्थिति को समझा और अंतिम फैसला सुनाया।
अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल
अदालत ने इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग किया। इस प्रावधान के तहत सुप्रीम कोर्ट को विशेष अधिकार प्राप्त हैं, जिनके जरिए वह पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए जरूरी आदेश दे सकता है। लंबे समय से अलग रह रहे पति-पत्नी के रिश्ते को ध्यान में रखते हुए अदालत ने इस अधिकार का इस्तेमाल कर तलाक को मंजूरी दी।
Supreme Court on Divorce Case: अवमानना से शुरू हुआ मामला

यह मामला अवमानना याचिका के रूप में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। इस साल जनवरी और फरवरी में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों से बातचीत की और समझौते की संभावना तलाशने की कोशिश की। कोर्ट की पहल पर एक व्यवस्थित बातचीत प्रक्रिया शुरू हुई, जिससे अंततः दोनों पक्ष आपसी सहमति तक पहुंच सके।
बिना दबाव के हुआ समझौता
अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता पूरी तरह स्वेच्छा से हुआ है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी तरह का दबाव या अनुचित प्रभाव इस समझौते में शामिल नहीं था। सभी शर्तों की जांच करने के बाद अदालत ने इसे कानूनी रूप से सही पाया और स्वीकार कर लिया।
Supreme Court on Divorce Case: पत्नी को मिलेगा गुजारा भत्ता
समझौते के तहत पति को पत्नी को 1 करोड़ रुपये की स्थायी गुजारा राशि देनी होगी। इसके अलावा, लोनावला स्थित एक संपत्ति में पत्नी का हिस्सा उसे उपहार विलेख के माध्यम से ट्रांसफर किया जाएगा। अदालत ने रजिस्ट्री में जमा 90 लाख रुपये भी पत्नी को जारी करने का आदेश दिया, ताकि आर्थिक शर्तें पूरी हो सकें।
सभी केस किए गए खत्म
इस मामले की सबसे अहम बात यह रही कि अदालत ने दोनों पक्षों के बीच चल रहे सभी 61 मामलों को खत्म कर दिया। इनमें आपराधिक केस, घरेलू हिंसा से जुड़े मामले, रिट याचिकाएं और अन्य कानूनी कार्यवाही शामिल थीं। अदालत ने साफ कहा कि अब दोनों पक्षों के बीच कोई भी लंबित विवाद नहीं रहेगा और भविष्य में भी कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। इस फैसले के साथ ही एक लंबी कानूनी लड़ाई का पूरी तरह अंत हो गया।
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