स्वस्थ भारत, विकसित भारत 2047 की नींव है: जेपी नड्डा

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नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली में आयोजित भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) के 23वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह मात्र उपाधि प्रदान करने का समारोह नहीं है, बल्कि उन छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के समर्पण, लगन और मेहनत का उत्सव है, जिन्होंने स्नातक होने वाले चिकित्सा पेशेवरों की सफलता में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि यह अवसर…

नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली में आयोजित भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) के 23वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह मात्र उपाधि प्रदान करने का समारोह नहीं है, बल्कि उन छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के समर्पण, लगन और मेहनत का उत्सव है, जिन्होंने स्नातक होने वाले चिकित्सा पेशेवरों की सफलता में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि यह अवसर स्नातक होने वाले उम्मीदवारों से जुड़े प्रत्येक परिवार, मार्गदर्शक और संस्थान के लिए गौरव का क्षण है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश के उभरते विशेषज्ञों को सम्मानित करके भारत अपने स्वास्थ्य सेवा तंत्र के भविष्य को आकार दे रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन युवा डॉक्टरों की विशेषज्ञता, नवाचार और प्रतिबद्धता देश की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान करने और देश भर में स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणालियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के विजन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ भारत ही एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र की नींव है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य राष्ट्रीय प्रगति और सतत विकास का एक प्रमुख स्तंभ है और एक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए अपरिहार्य है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा केवल भौतिक बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कुशल और दयालु डॉक्टरों का पोषण करना भी शामिल है जो स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की रीढ़ हैं।

उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं के रूप में, हम बुनियादी ढांचे और प्रणालियों को सुगम बना सकते हैं, लेकिन इमारतें तो हार्डवेयर हैं, जबकि डॉक्टर ही स्वास्थ्य सेवा का असली सॉफ्टवेयर हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि एनबीईएमएस योग्यताएं चिकित्सा शिक्षा में गुणवत्ता, उत्कृष्टता और विश्वास के प्रतीक के रूप में उभरी हैं।

उन्होंने कहा कि एनबीईएमएस ब्रांड आज राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है, जो रोगी देखभाल और पेशेवर उत्कृष्टता के प्रति समर्पित उच्च योग्य चिकित्सा विशेषज्ञों को तैयार करता है।

उन्होंने इस अवसर पर एनबीईएमएस द्वारा शुरू किए गए 11 नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम रोगी देखभाल को बेहतर बनाने, विशेष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और समाज को समग्र रूप से लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। एनबीईएमएस पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों में ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ (ओएनओएस) पहल के कार्यान्वयन की प्रशंसा करते हुए, उन्होंने छात्रों और संकाय सदस्यों के लिए शैक्षणिक संसाधनों और सीखने के अवसरों की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एनबीईएमएस को बधाई दी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात की पुष्टि की कि एनबीईएमएस कुशल और प्रतिबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों का उत्पादन करके देश में चिकित्सा शिक्षा और क्षमता निर्माण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देना जारी रखे हुए है।

पिछले एक दशक में चिकित्सा शिक्षा के अभूतपूर्व विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत ने स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना और चिकित्सा संस्थानों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है।

उन्होंने बताया कि 20वीं शताब्दी के अंत तक देश में केवल एक एम्स था, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में छह अतिरिक्त एम्स स्थापित किए गए। तब से अब तक 16 नए एम्स जुड़ चुके हैं, जिससे देश भर में इनकी कुल संख्या 23 हो गई है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार अब सभी एम्स संस्थानों को एम्स नई दिल्ली के मानकों के अनुरूप मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, साथ ही इन प्रमुख संस्थानों को देश भर के अन्य मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य सेवा संस्थानों को मार्गदर्शन देने में सक्षम बना रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी दी कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 818 हो गई है, जबकि स्नातक चिकित्सा सीटों की संख्या बढ़कर लगभग 1.28 लाख हो गई है। इसी प्रकार, स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों की संख्या लगभग 31,000 से बढ़कर लगभग 85,000 हो गई है।

उन्होंने आगे बताया कि पीएम मोदी ने अगले पांच वर्षों में स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों में 75,000 की वृद्धि की घोषणा की है, जिनमें से लगभग 23,000 सीटें पिछले दो वर्षों में ही स्थापित की जा चुकी हैं। सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गुणवत्ता मानकों को बढ़ाने के लिए 2026 से 2029 की अवधि के लिए लगभग 15,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि चिकित्सा शिक्षा केवल एक अधिकार नहीं बल्कि एक विशेषाधिकार है जो सरकार, शिक्षकों, संस्थानों और समाज के संयुक्त प्रयासों से संभव हो पाता है। उन्होंने स्नातक डॉक्टरों से करुणा, ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ समाज की सेवा करने का आग्रह किया।

युवा विशेषज्ञों को चिकित्सा शिक्षण और अकादमिक क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने पूरे पेशेवर जीवन में निरंतर सीखने के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने चिकित्सा अभ्यास और रोगी देखभाल में प्रभावी संचार कौशल के महत्व पर भी जोर दिया।

समग्र स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली का ध्यान उपचारात्मक देखभाल के साथ-साथ निवारक और संवर्धक स्वास्थ्य सेवाओं की ओर भी केंद्रित होना चाहिए। गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) के बढ़ते बोझ का उल्लेख करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जीवनशैली से संबंधित कारक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के रूप में उभर रहे हैं और स्वास्थ्य पेशेवरों से नागरिकों के बीच जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने का आह्वान किया।

उन्होंने स्नातक होने वाले डॉक्टरों से अपने पूरे करियर में सीखने की भावना और बौद्धिक जिज्ञासा को बनाए रखने का आग्रह करते हुए अपना भाषण समाप्त किया, और कहा कि चिकित्सा पेशे में उत्कृष्टता के लिए आजीवन सीखना आवश्यक है।

इस कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देश भर में विशेष चिकित्सा शिक्षा को और मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण रोगी देखभाल को बढ़ाने के उद्देश्य से 11 नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों का शुभारंभ भी किया।

–आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी

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