रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि रेलवे ने अपनी परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण (मोनेटाइजेशन) की योजना बनायी है और सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) के जरिए शुरू किए यात्री ट्रेन परिचालन से करीब 30,000 करोड़ रुपये के कुल निवेश का लक्ष्य रखा गया है। पीयूष गोयल ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रेलवे ने अपनी परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण की योजना बनायी है जिसमें चालू होने के बाद पूर्वी और पश्चिमी माल ढुलाई गलियारा, पीपीपी के तहत स्टेशनों का पुर्नविकास, हिल रेलवे और स्टेडियम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण से आधारभूत ढांचा के निर्माण के लिए अधिक संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि संपत्तियों के मौद्रीकरण का अर्थ उनका निजीकरण नहीं है बल्कि दोनों में अंतर है और मौद्रीकरण के बाद भी संपत्ति का स्वामित्व रेलवे के पास ही रहेगा। रेल मंत्री ने गुलबर्गा में रेलवे जोन स्थापित किए जाने की मांग पर कहा कि अध्ययन में इसे व्यवहार्य नहीं पाया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में व्यवहार्यता के अलावा आने वाले खर्च को भी ध्यान में रखा जाता है। इस पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि गुलबर्गा डिविजन बनाए जाने की घोषणा अध्ययन के बाद की गयी थी और इसके लिए जमीन भी दे दी गयी थी।
पीयूष गोयल ने निजी निवेश होने पर रोजगार के अवसर घटने संबंधी आशंकाओं को खारित करते हुए कहा कि निजी ट्रेनों में भी कर्मचारियों और विभिन्न सेवाएं मुहैया कराने वाले कर्मियों की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि रेलवे अपने नेटवर्क का अधिकतम उपयोग चाहता है। इससे यात्रियों को अच्छी और आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी वहीं विभाग की आय में भी वृद्धि होगी। गोयल ने कहा कि इस साल के बजट में रेलवे के लिए 2.15 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया जो पिछली सरकारों की तुलना में खासी बड़ी रकम है। लेकिन सुविधाएं जुटाने के लिए यह पर्याप्त नहीं है और उसके लिए शायद 50 लाख करोड़ रुपये भी कम पड़ जाएंगे।


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