नई दिल्ली, 22 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को कहा कि भारत न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों का भी समाधान प्रस्तुत करेगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम की महंगी तकनीक ग्लोबल साउथ के लिए हमेशा सुलभ नहीं हो सकती, जबकि भारत की तकनीक दुनिया को जोड़ने और सशक्त बनाने की क्षमता रखती है। विशेषकर ग्लोबल साउथ, उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भारत एक महत्वपूर्ण उत्तर बनकर उभरेगा। वह आईआईटी बॉम्बे में आयोजित भारत इनोवेट्स डीप टेक प्री-समिट 2026 में स्टार्टअप्स और नवोन्मेषकों के बीच बोल रहे थे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बताया कि ग्लोबल इनोवेशन रैंकिंग में भारत आज 38वें स्थान पर है, जबकि 2015 में यह 81वां स्थान था। यूनिकॉर्न कंपनियों के मामले में भारत 125 यूनिकॉर्न के साथ विश्व में तीसरे स्थान पर है। स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, एआई प्रतिभा और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी भारत तीसरे स्थान पर है। उन्होंने बताया कि पिछले 2016 से 2026 के बीच एआई क्षेत्र में भारत की प्रगति तीन गुना बढ़ी है, और उसका प्रभाव हमें इस कॉन्क्लेव में स्पष्ट रूप से देखने को मिला है।
केंद्रीय मंत्री ने यहां ऊर्जा, जलवायु एवं स्थिरता, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष एवं रक्षा, स्वास्थ्य एवं मेडटेक, उन्नत संगणना, जैव प्रौद्योगिकी, गतिशीलता एवं स्मार्ट सिटीज तथा इंडस्ट्री 4.0 जैसे विविध क्षेत्रों के नवोन्मेषकों से संवाद किया। यहां प्रत्येक क्षेत्र से अत्याधुनिक, शोध-आधारित समाधान प्रस्तुत किए गए। यहां प्रदर्शित तकनीकों को देखकर उन्होंने विश्वास जताया है कि आने वाले एक दशक में भारत कई क्षेत्रों में नेतृत्व की स्थिति में पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति का आकलन लंबे समय से विभिन्न संस्थाएं करती रही हैं। एक ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत नवाचार और डीप टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विश्व के शीर्ष पांच देशों में अपना स्थान बना चुका है। 64 तकनीकों के विश्लेषण में भारत 45 में अग्रणी स्थिति में दिखाई देता है। यह भारत की तकनीकी तैयारी की गहराई को दर्शाता है। डीप टेक्नोलॉजी के इस आयोजन की तैयारी पिछले वर्ष जुलाई से निरंतर चल रही है। लगभग 3000 स्टार्टअप्स और उनके नवाचारों को एकत्रित करके, पिछले वित्त वर्ष और इन दो दिनों में कुल 138 नवाचारों को यहां प्रदर्शित किया गया।
बता दें कि आने वाले जून महीने में फ्रांस में टेक्नोलॉजी से जुड़ा एक वैश्विक कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके लिए चयन प्रक्रिया जारी है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि आईआईटी बॉम्बे में प्रदर्शित 138 तकनीकें अपने आप में अद्वितीय, परिवर्तनकारी और नई दिशा देने वाली हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धा के माध्यम से कुछ परियोजनाओं का चयन किया जाएगा। इसका यह अर्थ नहीं है कि अन्य प्रतिभागियों का स्तर कम है। सभी का योगदान महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। इस दिशा में सबसे बड़ी जिम्मेदारी भारत की अकादमिक दुनिया, उद्योग जगत, वित्तीय क्षेत्र और हमारी युवा पीढ़ी पर है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र से उभर रही नवाचार की गहराई को देखना अत्यंत उत्साहजनक है। इसमें प्रौद्योगिकी-आधारित विकास, स्थिरता और वास्तविक प्रभाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मंच विचारों को निवेश से जोड़ने और उन्हें भविष्य के अनुरूप, विस्तार योग्य उद्यमों में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने सभी भागीदारों को इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, नवाचार को एक प्रमुख राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया है। भारतीय समाज में विचार और नवाचार की एक समृद्ध परंपरा रही है। यह केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है और न ही यह पश्चिमी मॉडल पर निर्भर है।
उन्होंने बताया कि डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में भारत ने एक वैश्विक मॉडल प्रस्तुत किया है। जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में भी भारत ने विश्व की जिम्मेदारी उठाई है। ये केवल कुछ उदाहरण हैं, अभी कई क्षेत्रों में और काम किया जाना बाकी है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इन सभी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमें दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी और तकनीक को जनहित से जोड़ना होगा। यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
–आईएएनएस
जीसीबी/डीकेपी
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