Telegram Ban During NEET Re-Exam: NEET 2026 री-एग्जाम से पहले सरकार द्वारा Telegram पर लगाई गई अस्थायी रोक को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह कदम पेपर लीक की खबरों को दबाने के लिए उठाया गया है। लेकिन सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों को ठगी और गलत जानकारी से बचाना है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Telegram पर स्थायी प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
यह केवल एक सीमित अवधि के लिए किया गया कदम है। यह रोक NEET री-एग्जाम के दौरान लागू की गई है और परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद हटा दी जाएगी। इस कार्रवाई का मकसद आम उपयोगकर्ताओं को परेशान करना नहीं है, बल्कि उन गतिविधियों को रोकना है जिनके जरिए छात्रों को गुमराह किया जा रहा था।
Central Government Decision: छात्रों को बनाया जा रहा था ठगी का शिकार

री-एग्जाम से पहले Telegram पर कई ऐसे चैनल सक्रिय थे जो खुद को “पेपर लीक” से जुड़ा बता रहे थे। इन चैनलों पर छात्रों से दावा किया जाता था कि उनके पास परीक्षा का असली प्रश्नपत्र मौजूद है। इन कथित पेपरों को खरीदने के लिए छात्रों से हजारों रुपये मांगे जा रहे थे। कुछ मामलों में यह रकम लाखों रुपये तक पहुंच रही थी। पैसे लेने के बाद छात्रों को या तो नकली सामग्री दी जाती थी या फिर कोई सामग्री नहीं मिलती थी। इस तरह के मामले केवल अफवाह फैलाने तक सीमित नहीं थे, बल्कि यह सीधे तौर पर आर्थिक धोखाधड़ी का मामला बन गया था।
परीक्षा को लेकर छात्र पहले से ही तनाव में रहते हैं। ठग इसी मानसिक स्थिति का फायदा उठा रहे थे। वे छात्रों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते थे कि अगर उन्होंने तुरंत पैसे नहीं दिए तो वे असली पेपर से वंचित रह जाएंगे। जल्दबाजी, गोपनीयता और परीक्षा का दबाव मिलकर छात्रों को जाल में फंसा रहा था। यही कारण है कि प्रशासन ने इसे केवल गलत सूचना का मामला नहीं बल्कि संगठित ठगी माना।
Central Govt Banned Telegram: Telegram के फीचर का किया जा रहा था गलत इस्तेमाल

Telegram में एक ऐसा फीचर मौजूद है जिसमें चैनल एडमिन पुराने संदेशों को बाद में संपादित कर सकते हैं। संपादन के बाद संदेश की सामग्री बदल जाती है, लेकिन कई बार पुरानी तारीख दिखाई देती रहती है। कुछ लोग इसी सुविधा का गलत फायदा उठा रहे थे। वे परीक्षा के बाद पुराने संदेशों में प्रश्न जोड़ देते थे और दावा करते थे कि उन्होंने परीक्षा से पहले ही पेपर लीक कर दिया था। इस तरह के फर्जी सबूत छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और डर पैदा कर रहे थे।
अधिकारियों ने कई चैनलों को हटाने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही एक चैनल बंद होता था, उसकी जगह नया चैनल शुरू हो जाता था।सरकार का कहना है कि Telegram के साथ कानूनी कार्रवाई करना भी आसान नहीं है क्योंकि कंपनी का भारत में कोई आधिकारिक कार्यालय या स्थानीय शिकायत निवारण व्यवस्था नहीं है। ऐसे में नियमों का पालन करवाना मुश्किल हो जाता है।
Telegram को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
दुनिया के कई देशों में Telegram को लेकर चिंताएं सामने आ चुकी हैं। विभिन्न रिपोर्टों में इस प्लेटफॉर्म का नाम ऑनलाइन धोखाधड़ी, अवैध कारोबार, साइबर अपराध और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़ा रहा है। इसी वजह से कई देशों ने समय-समय पर Telegram के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं।
दूसरे देशों में भी हुए ऐसे कदम
केवल भारत ही नहीं, कई देशों ने परीक्षाओं के दौरान इंटरनेट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक लगाई है। इराक, केन्या, जॉर्डन, सीरिया और अल्जीरिया जैसे देशों ने भी परीक्षा में नकल और पेपर लीक रोकने के लिए ऐसे कदम उठाए हैं। भारत में की गई कार्रवाई इनकी तुलना में काफी सीमित है क्योंकि यहां केवल एक ऐप पर कुछ दिनों के लिए रोक लगाई गई है।
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