नई दिल्ली : सशस्त्र बलों का राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल के संदर्भ में पूर्व सैनिकों की ओर से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे गए पत्र की पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा पर निशाना साधाते हुए कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी ‘अपनी हरकतों’ बाज आए और सेना का राजनीतिकरण बंद करे। पार्टी प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने यह दावा भी किया कि भाजपा ने जिस तरह से बालाकोट हवाई हमले का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया है उससे पूर्व सैनिकों को राष्ट्रपति को पत्र लिखना पड़ा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा अपने राजनीतिक फायदे के लिए सशस्त्र बलों का राजनीतिकरण कर रही है। पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। उन्होंने जो कहा है उस पर गौर करने की जरूरत है।’’
चतुर्वेदी ने सवाल किया, ‘‘ क्या विंग कमांडर के पोस्टरों का इस्तेमाल भाजपा की रैलियों में नहीं किया गया? हम कैसे भूल सकते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने सेना की वीरता का श्रेय लेने की कोशिश की है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें नहीं भूलना चाहिए कि बालाकोट में वायुसेना की कार्रवाई के बारे में प्रधानमंत्री ने लातूर की रैली में श्रेय लेने की कोशिश की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने ‘मोदी जी की सेना’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। यह पहली बार नहीं है कि भाजपा सेना का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है। करगिल के समय भी भाजपा के लोगों ने सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों के पोस्टर लगाए गए थे।’’
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ‘‘भाजपा अपनी हरकतों से बाज आए। वह सेना और उसकी वीरता की राजनीतिकरण करना बंद करे।’’ दरअसल, सेना के आठ पूर्व प्रमुखों और 148 अन्य पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर सशस्त्र सेनाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने पर आक्रोश जताया। पत्र पर जिन लोगों के हस्ताक्षर हैं उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्ज, जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉयचौधरी और जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एनसी सूरी शामिल हैं। तीन पूर्व नौसेना प्रमुखों एडमिरल (सेवानिवृत्त) एल रामदास, एडमिरल (सेवानिवृत्त) अरुण प्रकाश, एडमिरल (सेवानिवृत्त) मेहता और एडमिरल (सेवानिवृत्त) विष्णु भागवत ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। पत्र बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति के पास भेजा गया। पूर्व सैनिकों ने लिखा, ‘‘महोदय हम नेताओं की असामान्य और पूरी तरह से अस्वीकृत प्रक्रिया का जिक्र कर रहे हैं जिसमें वह सीमा पार हमलों जैसे सैन्य अभियानों का श्रेय ले रहे हैं और यहां तक कि सशस्त्र सेनाओं को ‘मोदी जी की सेना’ बताने का दावा तक कर रहे हैं।


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