पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दल बदलू का दौर जारी है। चुनाव से ठीक पहले टीएमसी में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को पार्टी ने प्रवेश के साथ ही नई जिम्मेदारियों से नवाजा है। टीएमसी ने पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और नेशनल वर्किंग कमिटी का सदस्य नियुक्त किया है।
सक्रिय राजनीति से दूर चल रहे सिन्हा ने शनिवार को ही कोलकाता में टीएमसी का दामन थामा। ममता बनर्जी की शरण में आते ही यशवंत सिन्हा ने कहा कि प्रजातंत्र की ताकत प्रजातंत्र की संस्थाएं होती हैं। आज लगभग हर संस्था कमजोर हो गई है, उसमें देश की न्यायपालिका भी शामिल है। हमारे देश के लिए ये सबसे बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद से ही मोदी सरकार के आलोचकों में से एक रहे हैं। बता दें कि 294 विधानसभा सीटों वाले पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में मतदान कराया जाना है। पहले चरण का मतदान 27 मार्च को होगा वहीं इसके बाद 1 अप्रैल को दूसरे राउंड की वोटिंग होनी है।
6 अप्रैल को तीसरे राउंड की वोटिंग होगी और चौथे चरण की वोटिंग 10 अप्रैल को होनी है। 17 अप्रैल को 5वें चरण की वोटिंग होगी। इसके बाद 22 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में छठे राउंड की वोटिंग होगी। सातवें राउंड का मतदान 26 अप्रैल को कराया जाएगा और फिर दो मई को वोटों की गिनती होगी।
सिन्हा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभा चुके हैं, लेकिन भगवा पार्टी के नेतृत्व से मतभेदों के चलते वर्ष 2018 में उन्होंने बीजेपी छोड़ दी। उनके बेटे जयंत सिन्हा झारखंड के हजारीबाग से बीजेपी के लोकसभा सदस्य हैं। सिन्हा ने कहा, ‘‘देश अजीब परिस्थिति से गुजर रहा है, हमारे मूल्य और सिद्धांत खतरे में हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र की मजबूती संस्थाओ में निहित है और सभी संस्थाओं को व्यवस्थागत तरीके से कमजोर किया जा रहा है।’’
सिन्हा (83 वर्षीय) ने बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन करने की शपथ ली। तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा में नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा,‘‘हम अपनी पार्टी में यशवंत सिन्हा का स्वागत करते हैं। उनकी हिस्सेदारी से चुनाव में बीजेपी के खिलाफ हमारी लड़ाई और मजबूत होगी।’’ सिन्हा ने वर्ष 1990 में चंद्रशेखर की सरकार में वित्तमंत्री की जिम्मेदारी निभाई थी और इसके बाद वाजपेयी मंत्रिमंडल भी उन्हें इस मंत्रालय का कार्यभार मिला। उन्होंने वाजपेयी सरकार में विदेशमंत्री की भी जिम्मेदारी निभाई।


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