टीएमसी ने भाजपा नेता दिलीप घोष के खिलाफ चुनाव आयोग से की शिकायत, बयान पर जताई आपत्ति

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कोलकाता, 18 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से उम्मीदवार दिलीप घोष के खिलाफ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) ने चुनाव आयोग से शिकायत की है। आरोप लगाया गया है कि दिलीप घोष टीएमसी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ सार्वजनिक रूप से हिंसा की धमकी देकर और कालीघाट और चेतला क्षेत्रों की आम जनता को धमकाकर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है। टीएमसी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि दिलीप घोष ने एआईटीसी नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम जनता के खिलाफ हिंसा की स्पष्ट और विशिष्ट धमकियों वाले…

कोलकाता, 18 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से उम्मीदवार दिलीप घोष के खिलाफ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) ने चुनाव आयोग से शिकायत की है। आरोप लगाया गया है कि दिलीप घोष टीएमसी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ सार्वजनिक रूप से हिंसा की धमकी देकर और कालीघाट और चेतला क्षेत्रों की आम जनता को धमकाकर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है।

टीएमसी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि दिलीप घोष ने एआईटीसी नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम जनता के खिलाफ हिंसा की स्पष्ट और विशिष्ट धमकियों वाले कई सार्वजनिक बयान दिए हैं। इन बयानों की वीडियो रिकॉर्डिंग और खबरें पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय नियंत्रण अधिनियम (एमसीसी) लागू होने के बाद भी विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे हैं।

आरोप है कि वीडियो में दिलीप घोष मंत्री और विधायक के आवास पर हमले की बात कर रहे हैं। दिलीप घोष के बयान का लहजा आपत्तिजनक और धमकी भरा है। उनके बयान केवल एआईटीसी के सम्मानित सदस्यों को धमकाने तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने कालीघाट और चेतला क्षेत्रों में हिंसा भड़काने या कारण बनने की सीधी धमकी भी दी है। जो आम जनता (अर्थात मतदाताओं) के लिए एक स्पष्ट और निर्विवाद धमकी है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे हमले ‘आगामी चुनाव से पहले’ होंगे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “मेरी बात याद रखना।”

पार्टी ने पत्र में लिखा है कि राजनीतिक प्रचार चुनाव का एक वैध और अपेक्षित पहलू है। मौजूदा विधायकों को नाम और निवास स्थान बताकर धमकाना, गंभीर शारीरिक चोट की स्पष्ट धमकी देना, पार्टी कार्यकर्ताओं को राज्यव्यापी हिंसा करने के लिए उकसाना, पूरे इलाकों और वहां की आम जनता को धमकाना लोकतांत्रिक आचरण के किसी भी मानक के तहत स्वीकार्य सीमा से कहीं अधिक है। मौजूदा मंत्री के आवास पर हुए हिंसक हमले का जिक्र मात्र एक तथ्य का बयान नहीं है। यह एक जानबूझकर और सोची-समझी धमकी है, जिसमें हिंसा की एक वास्तविक घटना का इस्तेमाल आने वाले खतरे की चेतावनी के रूप में किया गया है।

टीएमसी ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि कानून के अनुसार दिलीप घोष के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

–आईएएनएस

ओपी/एबीएम

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