आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने के लिए RBI ने नीतिगत ब्याज दर में फिर 0.25% की कटौती

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वृद्धि दर के अनुमान में कमी का कारण कमजोर वैश्विक परिदृश्य तथा निजी खपत में कमी है। रेपो दर में इस कटौती के साथ यह 5.7 प्रतिशत पर आ गयी है।

आर्थिक वृद्धि दर में नरमी के बीच रिजर्व बैंक ने गुरुवार को अपनी मुख्य नीतिगत ब्याज दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की कटौती की और साथ ही आगे के लिए नीतिगत रुख को ‘तटस्थ’ से ‘नरम’ कर दिया। इस साल यह लगातार तीसरा मौका है जब केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए सस्ता धन सुलभ कराने के लिए अपनी नीतिगत दर में कटौती की गयी है।
इन तीनों मौकों को मिला कर रेपो दर में कुल 0.75 प्रतिशत की कटौती हो चुकी है। रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उनकी तत्काल की जरूरत के लिए एक दिन के लिए धन उधार देता है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिये सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के पूर्व के 7.2 प्रतिशत के अनुमान को घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। 
वृद्धि दर के अनुमान में कमी का कारण कमजोर वैश्विक परिदृश्य तथा निजी खपत में कमी है। रेपो दर में इस कटौती के साथ यह 5.7 प्रतिशत पर आ गयी है। रेपो दर वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक बैंकों को कर्ज देता है। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही के लिये मुद्रास्फीति के अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर 3 से 3.1 प्रतिशत कर दिया है। 
यह सरकार द्वारा निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में है। मौद्रिक नीति घोषणा में कहा गया है, ‘‘मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) इस बात पर गौर करती है कि आर्थिक वृद्धि दर उल्लेखनीय रूप से कमजोर पड़ी है…निवेश गतिविधियों में तीव्र गिरावट के साथ निजी खपत वृद्धि में नरमी चिंता की बात है।’’ रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा 5 से 7 अगस्त 2019 को की जाएगी। 
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, आरबीआई किसी भी उपाय को करने में संकोच नहीं करेगा जो कि सिस्टम की वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, जिसमें शॉट-टर्म, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक शामिल हैं।

Desk Team