मालदा, 19 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी के बीच भाजपा सांसद खगेन मुर्मु ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट पर तीखा हमला बोला है। मालदा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस धीरे-धीरे अपने अंत की ओर बढ़ रही है और आने वाले समय में राज्य में उसका राजनीतिक आधार पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
सांसद खगेन मुर्मु ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए आरोप लगाया कि टीएमसी ने लंबे समय तक गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया तथा बंगाल और उसके लोगों के साथ लूट का एक व्यवस्थित तंत्र चलाया। इसी वजह से तृणमूल कांग्रेस का अंत तय है और आने वाले समय में पार्टी का कुछ भी नहीं बचेगा।
नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर भी खगेन मुर्मु ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को चुनाव आयोग देखेगा। क्या हुआ और किसने क्या किया, इस पर आयोग फैसला करेगा।
वहीं, नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव से ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान (डे) के नामांकन वापस लेने पर मुर्मु ने इसे ममता बनर्जी की रणनीति से जोड़ते हुए दावा किया कि उन्हें अंदाजा हो गया था कि चुनाव लड़ने पर हार का सामना करना पड़ सकता है और इससे उनकी साख प्रभावित होती।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर खगेन मुर्मु ने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में उनकी सरकार ने गुंडागर्दी पर रोक लगाने के लिए एक विधेयक पेश किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में गुंडागर्दी या अपराध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के फैसले पर मुर्मु ने कहा कि आयोग ही चुनाव से जुड़े अंतिम निर्णय लेगा और उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित करने जैसे मामलों पर फैसला करेगा।
इसी विवाद पर पटना में जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनके मुताबिक अदालत जो भी निर्देश देगी, वह सभी पक्षों को स्वीकार्य होगा। उन्होंने कहा कि जब किसी पार्टी के संगठन और चुनाव चिह्न पर दो विरोधी गुट दावा करते हैं और चुनाव अधिसूचना तक विवाद का समाधान नहीं होता, तो ऐसी स्थिति में चुनावी प्रक्रिया को लेकर विशेष व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है।
–आईएएनएस
एसएके/वीसी
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