रायपुर : छत्तीसगढ़ में चुनावी रणनीतियों को लेकर प्रदेश कांग्रेस की टीम घोषित कर दी गई है। हालांकि अभी पीसीसी कार्यकारिणी घोषित होना बाकी है। इसके बावजूद चुनावी तैयारियों को लेकर विभिन्न समितियों का ऐलान कर दिया गया है। इसमें चुनाव समिति एवं चुनाव अभियान समिति समेत अन्य कमेटियों को चुनावी रणनीतियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
प्रदेश में नए सिरे से कवायदें हो शुरू हो गई है। दिल्ली दरबार से घोषित समितियों में सभी वरिष्ठ नेताओं को एडजस्ट किया गया है। वहीं दूसरी ओर असंतुष्ट चल रहे नेताओं और लंबे समय से संगठन में खाली बैठे वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारी देने की कोशिशें की गई है। पहली बार कांग्रेस ने चुनाव से करीब साल भर पहले ही सभी समितियां घोषित की है।
इससे पहले केवल चुनाव के मौके पर ही कमेटियां घोषित होती रही है। इन समितियों में जातीय समीकरणों के साथ क्षेत्रीय संतुलन को भी महत्व दिया गया है। दलित एवं आदिवासी वर्ग को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर साधने की कोशिशें नजर आ रही है। वहीं विधानसभा में उपनेता की कुर्सी भी बस्तर संभाग के हवाले कर दी गई है। यही वजह है कि अब क्षेत्रीय संतुलन भी नजर आने लगा है। राज्य में आगामी नवंबर माह में विधानसभा के चुनाव होंगे।
सूत्र दावा करते हैं कि समय से काफी पहले ही कांग्रेस के प्रत्याशी भी घोषित कर दिए जाएंगे। इस मामले में दिल्ली स्तर पर राज्य के नेताओं के साथ कई दौर की चर्चा हो चुकी है।
इधर पार्टी में असंतुष्ट नेताओं को भी संगठन के पाले में लाने की कवायदें तेज हुई है। बूथ स्तरीय कमेटियों की मानिटरिंग की जवाबदारी भी वरिष्ठ नेताओं के हवाले की जा सकती है। इस मामले में कांग्रेस के रणनीतिकारों ने पहले ही एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। संगठन का काडर बनाने के बाद अब इसे धरातल पर अमलीजामा पहनाने की भी चुनौती है।
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