यूपी सरकार 1.04 करोड़ से संवारेगी गोमती नदी का उद्गम स्थल

Summary :

लखनऊ, 29 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विंध्य धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के व्यापक विकास के बाद अब प्रदेश सरकार ने जीवनदायिनी मां गोमती नदी के उद्गम स्थल को भी विश्वस्तरीय पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में पीलीभीत जनपद के पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र की कलीनगर तहसील स्थित गोमती उद्गम स्थल के विकास के लिए पर्यटन विभाग ने 1.04 करोड़ रुपए…

लखनऊ, 29 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विंध्य धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के व्यापक विकास के बाद अब प्रदेश सरकार ने जीवनदायिनी मां गोमती नदी के उद्गम स्थल को भी विश्वस्तरीय पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

इसी क्रम में पीलीभीत जनपद के पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र की कलीनगर तहसील स्थित गोमती उद्गम स्थल के विकास के लिए पर्यटन विभाग ने 1.04 करोड़ रुपए की परियोजना स्वीकृत की है। इसके तहत प्रथम चरण में 78 लाख रुपए की धनराशि जारी कर दी गई है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन का नया आकर्षण बनेगा।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नदियों के तटों पर हुआ है। प्रदेश की जीवनदायिनी एवं सांस्कृतिक आस्था की प्रतीक गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा ग्राम के समीप गोमत ताल (पूर्व नाम फुलहर झील) से होता है। सनातन परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित गोमती नदी प्रदेश के विशाल भूभाग को सिंचित करते हुए करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार है।

उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा गोमती उद्गम स्थल को एक प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। इसके तहत लगभग 48.69 लाख रुपए की लागत से बहुउद्देशीय हॉल बनाया जाएगा, जबकि 13.44 लाख रुपए से आधुनिक शौचालय ब्लॉक और 9.45 लाख रुपए से शेड का निर्माण कराया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, इंटरलॉकिंग मार्ग, आकर्षक उद्यान एवं सौंदर्यीकरण, सोलर-आधारित सुविधाओं, अन्य यात्री सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) को मिली है। गोमती नदी को सनातन परंपरा में विशेष सम्मान प्राप्त है। इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा क्षेत्र स्थित पौराणिक फुलहर झील (गोमत ताल) से होता है।

लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यह नदी पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर आदि जनपदों को जीवन प्रदान करती हुई अंततः गाजीपुर जिले में गंगा नदी में समाहित हो जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने गोमती नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित किया था।

वहीं, नैमिषारण्य में 33 कोटि देवी-देवताओं की तपस्थली भी गोमती नदी के तट पर ही मानी जाती है। यही कारण है कि गोमती नदी प्रदेश की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की वाहक मानी जाती है।

मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अपनी प्राकृतिक धरोहरों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मां गोमती का उद्गम स्थल महज एक भौगोलिक बिंदु न होकर, हमारी सनातन आस्था और लोकजीवन का महत्वपूर्ण स्थल भी है। इसके समग्र विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हमारा प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक पवित्र धरोहर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर सम्मानजनक स्थान दिलाया जाए।

–आईएएनएस

विकेटी/एसके

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.