मुंबई, 8 मई (आईएएनएस)। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की ‘वंदे मातरम’ पर की गई टिप्पणी का जोरदार जवाब देते हुए कहा कि इस गीत का विरोध करने वाला असल में भारतीय नहीं है और उसे इस देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में संजय निरुपम ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गीत अपनी 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों स्वतंत्रता सेनानियों और आम लोगों ने इसे गाया था और इससे प्रेरणा ली थी। अगर कोई ‘वंदे मातरम’ पर आपत्ति जताता है, तो वह असल में भारतीय नहीं है। जो कोई भी इस गीत का विरोध करता है, उसे इस देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि ओवैसी के पूर्वजों ने शायद यह गीत न गाया हो लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे गाया था। निरुपम ने साफ चेतावनी दी कि वंदे मातरम का अपमान भारत का अपमान है और ऐसे लोगों की नागरिकता तक रद्द की जानी चाहिए।
हिंदी भाषा का जिक्र करते हुए निरुपम ने कहा कि कोई किसी को हिंदी बोलने के लिए मजबूर नहीं करता। भले ही हिंदी को राष्ट्रभाषा न माना जाए, लेकिन यह राजभाषा और संवाद की भाषा के रूप में स्थापित है। इसे किसी ने थोपा नहीं है। अगर सरकारी अधिकारियों के लिए हिंदी सीखने का कोई प्रस्ताव आया है, तो मुझे नहीं लगता कि इस पर ज्यादा विवाद होना चाहिए। हिंदी सीखना नुकसान का सौदा नहीं है।
तमिलनाडु में कांग्रेस के हालिया राजनीतिक फैसले पर संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस ने गठबंधन का धर्म कभी नहीं निभाया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास यही रहा है। हाल ही में तमिलनाडु चुनाव में उसने डीएमके के साथ गठबंधन किया। डीएमके चुनाव हार गई। अब जब एक नई पार्टी और नया अभिनेता राजनीतिक नेता के रूप में उभरा है, तो कांग्रेस ने सत्ता की मलाई खाने के लिए अपने पांच विधायकों के साथ उसका समर्थन कर दिया, जबकि वह पार्टी डीएमके के खिलाफ चुनाव लड़कर आई थी। यह गठबंधन धर्म का अपमान है। कांग्रेस सत्ता लोभी पार्टी है और किसी भी प्रकार से किसी से भी समझौता कर सकती है।
उन्होंने सोमनाथ मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि एक हजार साल पहले महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर कई बार हमला किया था। उसने इस प्राचीन शिव मंदिर को तबाह और लूट लिया था। आज हम सोमनाथ पर हुए हमले की हजारवीं वर्षगांठ मना रहे हैं। सोमनाथ मंदिर का पुनरुद्धार और पुनर्निर्माण भारत के पुनरुत्थान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रमुख प्रतीक है।
–आईएएनएस
डीकेएम/पीएम
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