वेदांता पावर प्लांट हादसे पर प्रशासन सख्त, 30 दिन में मांगी रिपोर्ट

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सक्ती, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के डभरा तहसील अंतर्गत ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर लिमिटेड में हुए भीषण बॉयलर हादसे को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने दंडाधिकारी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अमृत विकास तोपनो ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 196 के तहत यह आदेश जारी किया है। जांच की जिम्मेदारी अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएस) डभरा विनय कुमार कश्यप को सौंपी गई है। बता दें कि 14 अप्रैल 2026 को प्लांट की बॉयलर यूनिट-1 में स्टीम पाइप से जुड़े वाटर सप्लाई पाइप…

सक्ती, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के डभरा तहसील अंतर्गत ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर लिमिटेड में हुए भीषण बॉयलर हादसे को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने दंडाधिकारी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अमृत विकास तोपनो ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 196 के तहत यह आदेश जारी किया है। जांच की जिम्मेदारी अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएस) डभरा विनय कुमार कश्यप को सौंपी गई है।

बता दें कि 14 अप्रैल 2026 को प्लांट की बॉयलर यूनिट-1 में स्टीम पाइप से जुड़े वाटर सप्लाई पाइप के ज्वाइंट में तकनीकी खराबी के चलते बड़ा हादसा हुआ था। इस दुर्घटना में कुल 34 श्रमिक प्रभावित हुए, जिनमें से 12 की मौत हो गई जबकि अन्य घायल श्रमिकों का इलाज रायगढ़ के फोर्टिस जिंदल अस्पताल, एपेक्स अस्पताल और बालाजी मेट्रो अस्पताल में जारी है।

जारी आदेश के अनुसार जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि दुर्घटना कब, कैसे और किन परिस्थितियों में हुई। साथ ही, घटना के समय मौके पर कार्यरत मजदूरों की जानकारी और मृतकों और घायलों की पहचान का सत्यापन भी किया जाएगा। जांच के दौरान उन कारणों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा, जिनसे यह हादसा हुआ।

इसके अलावा सहायक संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा (जिला जांजगीर-चांपा व सक्ती) द्वारा प्लांट के उत्पादन प्रारंभ होने से लेकर हादसे तक किए गए निरीक्षणों की समीक्षा भी की जाएगी। यह भी जांचा जाएगा कि यदि किसी प्रकार की खामियां पहले पाई गई थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई।

जांच अधिकारी को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे यह निर्धारित करें कि दुर्घटना तकनीकी कारणों से हुई या किसी मानवीय त्रुटि के कारण और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों या संस्थाओं की पहचान करें। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुझाव भी रिपोर्ट में शामिल किए जाएंगे। प्रशासन ने जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर संपूर्ण जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

–आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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