मैनपुरी, 14 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह ने शनिवार को कई राष्ट्रीय व राजनीतिक मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांशीराम की विरासत को लेकर चल रही सियासी बहस, एनसीईआरटी की किताबों से जुड़े विवाद, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव और ईरान-इजराइल तनाव के बीच गैस संकट पर अपनी बात रखी।
उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि विपक्ष अनावश्यक राजनीतिक मुद्दे खड़े कर रहा है जबकि सरकार और संस्थाएं अपने संवैधानिक दायित्वों के अनुसार काम कर रही हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर भी मंत्री जयवीर सिंह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि विपक्षी दलों का संवैधानिक संस्थाओं पर से भरोसा उठता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रहा है। कांग्रेस के कुछ सांसद पहले से ही लोकसभा की कार्यवाही से निष्कासित हैं और हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भी खारिज हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष बार-बार नए विवाद खड़े कर चर्चा में बने रहने की कोशिश करता है और इसी कड़ी में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया है।
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण गैस और पेट्रोल की संभावित कमी को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि देश में किसी प्रकार की कोई किल्लत नहीं है। विश्व में अनिश्चितता के इस दौर में यदि कोई देश सबसे कम प्रभावित है तो वह भारत है।
उन्होंने इसे भारत की कूटनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि विशेष परिस्थितियों के बावजूद भारत के ईरान के साथ मधुर संबंध बने हुए हैं और ऊर्जा संसाधनों से भरे कुछ जहाज भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसी भी स्थिति में देश में गैस या अन्य ऊर्जा स्रोतों की कमी नहीं होने दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूरी तरह सजग व संवेदनशील है और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बहुजन आंदोलन के प्रमुख नेता कांशीराम की विरासत को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चल रही राजनीतिक दावेदारी पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री जयवीर सिंह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में दबे-कुचले, वंचित और शोषित वर्गों को न्याय दिया होता तो कांशीराम का आंदोलन खड़ा ही नहीं होता।
उनके अनुसार लंबे समय तक शासन करने के बावजूद कांग्रेस इन वर्गों को उचित अधिकार और सम्मान नहीं दिला सकी, जिसके परिणामस्वरूप समाज में असंतोष पैदा हुआ और दलित आंदोलन को नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि इसी पृष्ठभूमि में कांशीराम के नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी और बामसेफ जैसे संगठनों का उदय हुआ। कांग्रेस को इस ऐतिहासिक विफलता के लिए पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।
राज्यसभा में प्रियंका चतुर्वेदी द्वारा एनसीईआरटी की पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय को हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ‘न्यायिक तानाशाही’ बताए जाने पर भी मंत्री जयवीर सिंह ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के आदेश के तहत संबंधित अध्याय को हटाने का निर्देश दिया गया था और इस मामले में जो भी आवश्यक प्रक्रिया थी, वह पूरी कर ली गई है। इस संबंध में शपथपत्र का प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जा चुका है। न्यायपालिका और सरकार के बीच चल रहे किसी भी प्रकरण को लेकर विपक्ष को अनावश्यक चिंता जताने की जरूरत नहीं है। अदालत का जो भी अंतिम आदेश होगा, उसका पालन किया जाएगा।
–आईएएनएस
एएसएच/पीएम
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