VS Achuthanandan Padma Vibhushan Award: तिरुवनंतपुरम, 26 जनवरी (आईएएनएस)। सीपीआई (एम) ने पार्टी नेता और केरल केपूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन को मरणोपरांत मिले पद्म विभूषण सम्मान को स्वीकार करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित करने की घोषणा की।
यह निर्णय सीपीआई (एम) पार्टी के लिए एक असामान्य बदलाव को दिखाता है। ऐतिहासिक रूप से सीपीआई (एम) राज्य द्वारा दिए गए सम्मान को स्वीकार नहीं करती रही है, क्योंकि पार्टी का मानना है कि कम्युनिस्ट पुरस्कार या राज्य की प्रशंसा के लिए काम नहीं करते।
इस वर्ष के पद्म पुरस्कारों की घोषणा रविवार को की गई थी, जिसमें वीएस अच्युतानंदन उन आठ मलयाली लोगों में शामिल थे जिन्हें प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान दिया गया। इस घोषणा के बाद अच्युतानंदन के परिवार ने सरकार के निर्णय का स्वागत किया।
वीएस अच्युतानंदन के पुत्र अरुण कुमार ने कहा कि यह पुरस्कार उनके पिता की दशकों लंबी सार्वजनिक सेवा को सम्मानित करता है और केरल समेत भारतीय राजनीति में उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता का प्रतीक है।
घोषणा के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि सीपीआई (एम) पुरस्कार न लेने की पुरानी परंपरा को बनाए रखेगी और इस सम्मान को स्वीकार नहीं करेगी, लेकिन सोमवार को सीपीआई (एम) के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने पुष्टि की कि पार्टी अच्युतानंदन को दिया गया पद्म विभूषण स्वीकार करेगी।
नरसिम्हा राव सरकार के समय वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता ईएमएस नंबूदिरिपाद ने पार्टी की नीति के अनुसार पद्म विभूषण अस्वीकार कर दिया था।
1996 में जब यूनाइटेड फ्रंट सरकार ने तत्कालीन पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ज्योति बसु को भारत रत्न देने पर विचार किया तो बसु और सीपीआई (एम) ने पहले ही बता दिया था कि यह सम्मान स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिसके बाद प्रस्ताव रद्द कर दिया गया।
इसी तरह हरकिशन सिंह सुरजीत और पूर्व पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने भी पद्म भूषण और अन्य सम्मान अस्वीकार किए थे।
हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने अच्युतानंदन के मामले को अलग देखा। उनके केरल की राजनीति में विशाल योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान मरणोपरांत मिला है, इसलिए इसे स्वीकार करने का निर्णय लिया गया।
वीएस अच्युतानंदन सीपीआई (एम) के सबसे प्रसिद्ध जन नेता रहे हैं और वे पार्टी की सीमाओं से परे एक प्रभावशाली व्यक्तित्व थे।
पद्म विभूषण को स्वीकार करने का यह निर्णय उनकी स्थायी विरासत को मान्यता देने के रूप में देखा जा रहा है और यह पार्टी की राज्य सम्मान की नीति को भी बदल सकता है।
अच्युतानंदन का निधन 21 जुलाई 2025 को 101 वर्ष की आयु में हुआ था।


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