केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ बोर्ड और परिषद में एक ही धर्म के लोगों को नियुक्त करने के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों की आलोचना की और विपक्षी पार्टियों पर देश को तोड़ने का आरोप लगाया। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर लोकसभा में जारी चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए अमित शाह ने कहा कि सभी ट्रस्टों के कमिश्नरों के संबंधित धर्म से ही होने की व्यवस्था करके ये लोग देश को तोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि वक्फ में एक भी गैर-मुस्लिम नहीं आएगा, और इस विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड और परिषद का काम इन संपत्तियों को बेईमानी से हड़पने वाले लोगों को पकड़कर उन्हें बाहर निकालने का है। वक्फ के नाम पर औने-पौने दाम में इन संपत्तियों को सौ-सौ साल तक किराए पर देने वाले लोगों को पकड़ना होगा। वक्फ की आमदनी लगातार गिरती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से माइनॉरिटी का विकास करना, माइनॉरिटी को आगे बढ़ाना और इस्लाम धर्म की सभी धार्मिक संस्थाओं को पुख्ता करना सरकार का उद्देश्य है।
Waqf Bill पर गृहमंत्री Amit Shah की दो-टूक, संसद का कानून है सभी को मानना होगा
गृह मंत्री ने कहा कि जो पैसा चोरी हो रहा है, उसे पकड़ने का काम वक्फ बोर्ड और परिषद करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग चाहते हैं कि उनके राज्यों में जो मिलीभगत चल रही थी, वह लगातार चलती रहे, लेकिन सरकार इसे नहीं चलने देगी। उन्होंने कहा, “2013 में वक्फ कानून में जो संशोधन किए गए थे, यदि वे नहीं किए गए होते तो इस विधेयक की आवश्यकता नहीं होती।”
अमित शाह ने कहा कि 2014 में चुनाव आने वाले थे और 2013 में रातों-रात तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वक्फ कानून को “एक्सट्रीम” बना दिया गया था। इसके परिणामस्वरूप दिल्ली के लुटियन्स क्षेत्र की 123 वीवीआईपी संपत्तियां कांग्रेस सरकार ने चुनाव से केवल 25 दिन पहले वक्फ को दे दी थीं। इसे कहते हैं तुष्टिकरण की राजनीति। अगर वह कानून 2014 के चुनाव से पहले न लाया गया होता तो आज इस वक्फ संशोधन विधेयक को लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।


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