पुणे की प्रियंका कांबले ने ससुराल में ताने सुनने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। उन्होंने पुणे में कूड़ा बीनते हुए स्वच्छ सहकारी समिति की मदद से पढ़ाई फिर से शुरू की और एसएससी परीक्षा पास की, जिससे उन्होंने समाज में अपनी पहचान बनाई।
Pune News: देश-दुनिया से आए दिन हैरान कर देने वाली और प्रेरणादायक खबरें सामने आती हैं. जिसमें कई बार देखा जाता है कि किसी गरीब घर का बच्चा कड़ी मेहनत के बाद एक उच्च पद हासिल कर लेता है. ऐसी कहानी से आप लोग हर दिन रूबरू होते होंगे, लेकिन आज हम आपको दो ऐसी महिलाओं की कहानी से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्होंने अनपढ़ होने के बाद दूबारा पढाई चालू की कड़ी मेहनत के बाद एसएससी की परीक्षा पास की.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एसएससी परीक्षा पास करने वाली पहली महिला पुणे की रहने वाली 27 वर्षीय प्रियंका कांबले हैं, जो स्वच्छ सहकारी समिति की सदस्य हैं, कांबले पहले सिर्फ तीसरी कक्षा तक पढ़ पाई थीं. शादी के बाद जब वह सोलापुर में ससुराल गईं, तो वहां उन्हें लगातार “अनपढ़” कहकर ताना मारा जाता था. इससे आहत होकर उन्होंने ससुराल छोड़ दिया और पुणे आकर कूड़ा बीनने का काम करने लगीं.
2022 में दुबारा शूरू की पढाई
प्रियंका ने 2022 में रमाबाई रानाडे स्कूल में फिर से पढ़ाई शुरू की. वह सुबह कूड़ा इकट्ठा करतीं, बेटे के लिए खाना बनातीं और दोपहर में स्कूल जातीं. कई बार देर से पहुंचने पर भी शिक्षकों ने उनका साथ नहीं छोड़ा. इस साल उन्होंने एसएससी की परीक्षा में 48% अंक हासिल किए. परीक्षा पास करने के बाद उनके पति ने फोन कर उन्हें बधाई दी और मिठाई बाँटने को कहा. अब प्रियंका का सपना है कि वह एक आंगनवाड़ी सेविका बनें.
कोमल गायकवाड़ का संकल्प और सफलता
वहीं दूसरी महिला दांडेकर पुल वस्ती की 26 साल की कोमल गायकवाड़ हैं. इनकी शादी 20 साल की उम्र में हो गई थी. उन्होंने कभी स्कूल का चेहरा नहीं देखा था. शादी के बाद उनके ससुराल वाले उन्हें उनकी अशिक्षा को लेकर नीचा दिखाते थे. जब कोविड के दौरान उनके पति की मृत्यु हो गई, तो वह गर्भवती थीं और एक छोटे बच्चे की मां भी थीं.
नाइट स्कूल में लिया दाखिला
ऐसे मुश्किल वक्त में उन्होंने हार नहीं मानी. कोमल ने नाइट स्कूल में दाखिला लिया और मेहनत से पढ़ाई की. नतीजा यह हुआ कि उन्होंने एसएससी परीक्षा में 58% अंक प्राप्त किए. उनकी बेटी, जो अभी पांचवी कक्षा में पढ़ती है, मां की सफलता पर बहुत खुश हुई. कोमल अब जूनियर कॉलेज में पढ़ाई करना चाहती हैं और उनका कहना है कि उनके शिक्षक उनका आगे भी मार्गदर्शन करेंगे.
Shivangi Shandilya
शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।
पुणे की प्रियंका कांबले ने ससुराल में ताने सुनने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। उन्होंने पुणे में कूड़ा बीनते हुए स्वच्छ सहकारी समिति की मदद से पढ़ाई फिर से शुरू की और एसएससी परीक्षा पास की, जिससे उन्होंने समाज में अपनी पहचान बनाई।
Pune News: देश-दुनिया से आए दिन हैरान कर देने वाली और प्रेरणादायक खबरें सामने आती हैं. जिसमें कई बार देखा जाता है कि किसी गरीब घर का बच्चा कड़ी मेहनत के बाद एक उच्च पद हासिल कर लेता है. ऐसी कहानी से आप लोग हर दिन रूबरू होते होंगे, लेकिन आज हम आपको दो ऐसी महिलाओं की कहानी से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्होंने अनपढ़ होने के बाद दूबारा पढाई चालू की कड़ी मेहनत के बाद एसएससी की परीक्षा पास की.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एसएससी परीक्षा पास करने वाली पहली महिला पुणे की रहने वाली 27 वर्षीय प्रियंका कांबले हैं, जो स्वच्छ सहकारी समिति की सदस्य हैं, कांबले पहले सिर्फ तीसरी कक्षा तक पढ़ पाई थीं. शादी के बाद जब वह सोलापुर में ससुराल गईं, तो वहां उन्हें लगातार “अनपढ़” कहकर ताना मारा जाता था. इससे आहत होकर उन्होंने ससुराल छोड़ दिया और पुणे आकर कूड़ा बीनने का काम करने लगीं.
2022 में दुबारा शूरू की पढाई
प्रियंका ने 2022 में रमाबाई रानाडे स्कूल में फिर से पढ़ाई शुरू की. वह सुबह कूड़ा इकट्ठा करतीं, बेटे के लिए खाना बनातीं और दोपहर में स्कूल जातीं. कई बार देर से पहुंचने पर भी शिक्षकों ने उनका साथ नहीं छोड़ा. इस साल उन्होंने एसएससी की परीक्षा में 48% अंक हासिल किए. परीक्षा पास करने के बाद उनके पति ने फोन कर उन्हें बधाई दी और मिठाई बाँटने को कहा. अब प्रियंका का सपना है कि वह एक आंगनवाड़ी सेविका बनें.
कोमल गायकवाड़ का संकल्प और सफलता
वहीं दूसरी महिला दांडेकर पुल वस्ती की 26 साल की कोमल गायकवाड़ हैं. इनकी शादी 20 साल की उम्र में हो गई थी. उन्होंने कभी स्कूल का चेहरा नहीं देखा था. शादी के बाद उनके ससुराल वाले उन्हें उनकी अशिक्षा को लेकर नीचा दिखाते थे. जब कोविड के दौरान उनके पति की मृत्यु हो गई, तो वह गर्भवती थीं और एक छोटे बच्चे की मां भी थीं.
नाइट स्कूल में लिया दाखिला
ऐसे मुश्किल वक्त में उन्होंने हार नहीं मानी. कोमल ने नाइट स्कूल में दाखिला लिया और मेहनत से पढ़ाई की. नतीजा यह हुआ कि उन्होंने एसएससी परीक्षा में 58% अंक प्राप्त किए. उनकी बेटी, जो अभी पांचवी कक्षा में पढ़ती है, मां की सफलता पर बहुत खुश हुई. कोमल अब जूनियर कॉलेज में पढ़ाई करना चाहती हैं और उनका कहना है कि उनके शिक्षक उनका आगे भी मार्गदर्शन करेंगे.
Shivangi Shandilya
शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।