नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को महत्वपूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार से इसका इस्तेमाल भारत के हित में करने की अपील की। उन्होंने वंदे मातरम को लेकर केंद्र सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए और इसे सांप्रदायिक राजनीति से जोड़ने का आरोप लगाया।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात और करीब सात साल बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे पर हन्नान मोल्लाह ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री की ओर से इसे अभूतपूर्व आयोजन के तौर पर पेश किए जाने पर तंज भी कसा। मोल्लाह ने कहा कि ब्रिक्स ऐसा मंच है जहां विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष राजनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत कर सकते हैं। भारत को इस अवसर का इस्तेमाल रोजगार, व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत को केवल खुद को ‘विश्वगुरु’ बताने के बजाय दूसरे देशों के साथ बेहतर व्यापारिक संबंध और रोजगार से जुड़े सहयोग की संभावनाएं तलाशनी चाहिए। अगर सरकार ब्रिक्स के मंच का सही तरीके से इस्तेमाल करे तो भारत को इसका फायदा मिल सकता है।
शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर पूर्व सांसद ने कहा कि भारत और चीन दुनिया के दो बड़े देश हैं और दोनों के बीच टकराव किसी के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को आपसी संबंध बेहतर रखने चाहिए और लंबित समस्याओं को बातचीत के जरिए हल करने का प्रयास करना चाहिए। चीनी राष्ट्रपति का भारत आना दोनों देशों के लिए बातचीत का अवसर है। उन्होंने केंद्र सरकार से सीमा समेत अन्य मुद्दों पर चीन के साथ चर्चा करने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।
वंदे मातरम को लेकर हन्नान मोल्लाह ने केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मूल रूप से लंबे समय से गाए जा रहे गीत के हिस्से के बजाय उसके अन्य छंदों को अनिवार्य बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद लंबे समय से स्वतंत्रता आंदोलन और सार्वजनिक जीवन में प्रचलित रहे हैं, जबकि बाद के छंदों को लेकर उनका राजनीतिक और सांप्रदायिक संदर्भ अलग है। भाजपा इस मुद्दे का इस्तेमाल सांप्रदायिक राजनीति के लिए कर रही है।
उन्होंने कहा कि देशभक्ति साबित करने के लिए किसी व्यक्ति को किसी विशेष तरीके से पूरा गीत गाने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। सम्मान के लिए खड़ा होना अलग बात है, लेकिन पूरे गीत का गायन अनिवार्य नहीं होना चाहिए।
वंदे मातरम को लेकर कर्नाटक सरकार के फैसले पर मोल्लाह ने कहा कि यह सही कदम है। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय से प्रचलित परंपरा के अनुरूप गीत के शुरुआती दो छंद गाए जाते रहे हैं और किसी नए कानून के जरिए अतिरिक्त हिस्से को अनिवार्य करने का वह विरोध करते हैं। उन्होंने कांग्रेस समेत सभी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष दलों से ऐसे मुद्दों पर सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। सरकारें स्थायी नहीं होतीं और सत्ता बदलने पर मौजूदा कानूनों की समीक्षा की जा सकती है।
–आईएएनएस
पीएसके
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