प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कोऑपरेटिव में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर बैठक की और इसके साथ ही भारतीय कोऑपरेटिव सेक्टर को बढ़ाने के लिए वैश्विक कोऑपरेटिव संस्थाओं के साथ भागीदारी पर जोर दिया।
पीएमओ के बयान के मुताबिक, इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सहकार से समृद्धि’ को प्रमोट करने को लेकर भी बातचीत की। साथ ही, कोऑपरेटिव संस्थाओं के माध्यम से जैविक उत्पादों को प्रमोट करने पर जोर दिया।
उन्होंने निर्यात बाजारों पर ध्यान केंद्रित करने तथा कृषि पद्धतियों में सुधार के लिए को ऑपरेटिव के माध्यम से मृदा परीक्षण मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया।
प्रधानमंत्री ने वित्तीय लेनदेन को सुविधाजनक बनाने के लिए यूपीआई को रुपे केसीसी कार्ड के साथ एकीकृत करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कोऑपरेटिव संस्थाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने पारदर्शिता को बरकरार रखने के लिए कोऑपरेटिव संस्थाओं की संपत्तियों के दस्तावेजीकरण करने के महत्व पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने स्कूलों, कॉलेजों और आईआईएम में कोऑपरेटिव कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव रखा, साथ ही भावी पीढ़ियों को प्रेरित करने के लिए सफल कोऑपरेटिव संस्थाओं को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव रखा।
उन्होंने आगे कहा कि युवा स्नातकों को योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, और कोऑपरेटिव संस्थाओं को उनके प्रदर्शन के आधार पर रैंक किया जाना चाहिए, ताकि प्रतिस्पर्धा और विकास को एक साथ बढ़ावा दिया जा सके।
बैठक के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला गया कि वर्तमान में देश की आबादी का पांचवां हिस्सा कोऑपरेटिव सेक्टर से जुड़ा हुआ है, जिसमें 30 से अधिक क्षेत्रों में फैली 8.2 लाख से अधिक कोऑपरेटिव संस्थाएं शामिल हैं, इन संस्थाओं से 30 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं।बैठक में गृह एवं कोऑपरेटिव मंत्री अमित शाह, कोऑपरेटिव मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार भूटानी, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास शामिल हुए।


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