वार्षिक रथ यात्रा से ठीक एक दिन पहले अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंस्ति रेत कलाकार पद्म श्री सुदर्शन पटनायक ने पुरी समुद्र तट पर दुनिया की सबसे बड़ी रेत कला रथ बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने भगवान जगन्नाथ के रथ (नंदीघोष रथ) की 3 डी सैंड आर्ट बनाई, जो 43.2 फीट लंबी और 35 फीट चौड़ी है। सुदर्शन ने ट्वीट किया कि रथ यात्रा के अवसर पर हमने ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर 43.2 फीट लंबे और 35 फीट चौड़े भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ का सबसे बड़ा 3 डी सैंड आर्ट रथ बनाया है। हमें उम्मीद है कि यह एक नया रिकॉर्ड होगा।
सुदर्शन के नाम गिनीज रिकॉर्ड समेत कई लिम्का रिकॉर्ड हैं। अब तक पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित सेंड कलाकार सुदर्शन ने दुनिया भर में 60 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और समारोहों में भाग लिया है और देश के लिए कई पुरस्कार जीते हैं। इस बीच केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद्मश्री कैलाश खेर और भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा द्वारा गाया गया ‘जगन्नाथ स्वामी’ नामक एक भक्ति गीत जारी किया। ‘अष्टकम’ की रचना आदि शंकराचार्य ने की थी। धर्मेद्र प्रधान ने एक ट्वीट कर कहा कि संबित पात्रा और कैलाश खेर द्वारा महाप्रभु को समर्पित एक मधुर भजन ‘जगन्नाथ अष्टकम’ का शुभारंभ करने के लिए सम्मानित।
हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथजी की पुरी में रथ यात्रा निकाली जाती है। रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ के अलावा उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा का रथ भी निकाला जाता है। इस रथ यात्रा को लेकर मान्यता है कि एक दिन भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने उनसे द्वारका के दर्शन कराने की प्रार्थना की थी। तब भगवान जगन्नाथ ने अपनी बहन की इच्छा पूर्ति के लिए उन्हें रथ में बिठाकर पूरे नगर का भ्रमण करवाया था और इसके बाद से इस रथयात्रा की शुरुआत हुई थी।
जगन्नाथजी की रथ यात्रा के बारे में स्कंद पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और ब्रह्म पुराण में भी बताया गया है। इसलिए हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति इस रथयात्रा में शामिल होकर इस रथ को खींचता है उसे सौ यज्ञ करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। इस बार भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का उत्सव 12 जुलाई, सोमवार से शुरू हो रहा है।


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