महाराष्ट्र की एक स्थानीय कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले के आरोपियों में से एक मिलिंद एकबोटे पर लगाई गई कुछ शर्तों में ढील देकर उन्हें राहत दी है। इन शर्तों में पुलिस थाने में साप्ताहिक हाजरी लगाना, सार्वजनिक रैलियों में बोलना और मीडिया से बात करना आदि शामिल हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एएन सिरसीकर द्वारा 14 जनवरी को दिए गए आदेश के अनुसार, मिलिंद एकबोटे को अब प्रत्येक सोमवार को शिकारपुर पुलिस थाना जाने की जरुरत नहीं है। इसी थाने में उनके और दक्षिणपंथी नेता और मामले के सह-आरोपी संभाजी भिड़े के खिलाफ मामला दर्ज है।
रिपोर्ट : योजना बनाकर की गई थी भीमा-कोरेगांव हिंसा, संभाजी और मिलिंद ‘मुख्य साजिशकर्ता’
कोर्ट ने उन्हें उन शर्तों से भी छूट दे दी, जिनके तहत पहले उन पर सार्वजनिक रैलियों में बोलने और मीडिया से बात करने पर भी रोक लगा दी गई थी। इन शर्तों में ढील के साथ ही अब एकबोटे मीडिया से बात कर सकते हैं और सार्वजनिक रैलियों को संबोधित कर सकते हैं।


Download Android App
Download iOS App




