BJP and Aimim Alliance Broken: महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद में बना बीजेपी और कांग्रेस का गठबंधन अब ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया। बुधवार को इस गठबंधन की खबर सामने आने के बाद दोनों दलों की काफी आलोचना हुई। विवाद बढ़ता देख अब कांग्रेस ने खुद ही इस गठजोड़ से कदम पीछे खींच लिए हैं। वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस पूरे मामले पर कड़ा ऐतराज जताया था।
BJP and Aimim Alliance Broken: ज्यादा देर नहीं चला स्थानीय स्तर पर बना गठजोड़
अंबरनाथ नगर परिषद में यह गठबंधन एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से दूर रखने के उद्देश्य से किया गया था। बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर नगर परिषद पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन यह राजनीतिक समीकरण कुछ ही दिनों में टूट गया।
Congress Aimim Alliance: कांग्रेस ने की सख्त कार्रवाई
गठबंधन टूटने के बाद कांग्रेस ने कड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने अंबरनाथ के ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया है। उन पर बीजेपी के साथ स्थानीय स्तर पर बिना अनुमति गठबंधन करने का आरोप है। इसके साथ ही कांग्रेस ने अंबरनाथ की स्थानीय इकाई को भंग कर दिया है और वहां से चुने गए सभी 12 कांग्रेस पार्षदों को भी सस्पेंड कर दिया गया है।

Maharashtra News Update: कांग्रेस की सफाई
इस पूरे मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच कोई आधिकारिक गठबंधन नहीं है। उन्होंने बताया कि बिना पार्टी नेतृत्व की अनुमति के गठबंधन बनाया गया था, जो अनुशासन के खिलाफ है। इसी वजह से संबंधित नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
CM फडणवीस की कड़ी चेतावनी
कांग्रेस की कार्रवाई से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अंबरनाथ और अकोला में कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ गठबंधन को लेकर बीजेपी नेताओं को फटकार लगाई थी। उन्होंने साफ कहा था कि पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के बिना ऐसे किसी भी गठबंधन को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फडणवीस ने कहा था कि अगर किसी स्थानीय नेता ने अपनी मर्जी से कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ हाथ मिलाया है, तो यह पार्टी अनुशासन का उल्लंघन है और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी बताया था कि ऐसे गठबंधनों को रद्द करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

अंबरनाथ नगर परिषद का गणित
अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 59 पार्षद हैं। यहां 20 दिसंबर 2025 को चुनाव हुए थे और 21 दिसंबर को नतीजे घोषित किए गए। एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जिसने 27 सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत से वह चार सीट पीछे रह गई। बीजेपी को 15, कांग्रेस को 12 और अजित पवार गुट की एनसीपी को 4 सीटें मिली थीं। इन तीनों दलों के पास कुल 31 पार्षद थे, जो बहुमत के आंकड़े 30 से एक ज्यादा थे।
‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ का गठन
शिवसेना (शिंदे) को सत्ता से बाहर रखने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ बनाई थी। इस गठबंधन की जानकारी 1 जनवरी को सामने आई थी। हालांकि यह प्रयोग ज्यादा समय तक सफल नहीं हो सका।
शिवसेना (शिंदे) की नाराजगी
बीजेपी–कांग्रेस गठबंधन को लेकर शिवसेना (शिंदे) के नेताओं में भारी नाराजगी देखी गई। पार्टी के विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने इसे विश्वासघात करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वाली बीजेपी का सत्ता के लिए कांग्रेस के साथ जाना शिवसेना (शिंदे) की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।


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