Congress Leadership Crises in Assam: असम में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। इस कड़ी में ताजा नाम नागांव से दो बार के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का जुड़ गया है। उन्होंने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। बोरदोलोई राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। पिछले तीन महीनों में कई वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे के बाद यह कांग्रेस के लिए एक और बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
Assam Assembly Elections: इस्तीफे में जताई नाराजगी

बोरदोलोई ने कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़के को भेजे पत्र में लिखा कि वह भारी मन से यह फैसला ले रहे हैं। उन्होंने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन के हर पड़ाव विधायक, मंत्री या सांसद के दौरान उन्होंने राज्य के हित को प्राथमिकता दी। साथ ही यह भी संकेत दिया कि यदि काम करने में बाधा महसूस होती है, तो वह नए विकल्प तलाशने से पीछे नहीं हटेंगे।
बता दें, चुनाव से पहले कांग्रेस में टूट का सिलसिला लगातार जारी है। बीते महीने असम में नेताओं के जाने का सिलसिला चलने लगा था। पिछले तीन महीनों में कई प्रमुख नेताओं ने पार्टी छोड़ी है, जिससे संगठन की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। प्रद्युत इस मामले में पार्टी के लिए बड़ी क्षति हैं।
Congress Leadership Crises in Assam: भूपेन कुमार बोरा का जाना बड़ा झटका

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने फरवरी में पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया। उन्होंने संगठनात्मक फैसलों से असहमति और आत्मसम्मान का मुद्दा उठाया था। इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए, जहां मुख्यमंत्री हिमंता बिश्व शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया की मौजूदगी रही।
Assam Elections 2026: अबुल मिया और रेजाउल करीम सरकार का भी साथ छूटा
बता दें, सिर्फ प्रद्युत ही नहीं, अबुल मिया ने भी कांग्रेस छोड़कर रायजोर दल का दामन थाम लिया। धुबरी जिले में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए इसे पार्टी के लिए अहम झटका माना जा रहा है। वहीं रेजाऊल करीम सरकार भी कांग्रेस में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद पार्टी से अलग हो गए। वे पहले आल असम मनॉरटी स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष रह चुके हैं।
Congress Assam News: संगठन पर उठे सवाल
रतुल कलिता ने 7 मार्च को इस्तीफा देते हुए पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है और संगठन में केवल राजनीतिक परिवारों को प्राथमिकता मिलती है। लगातार हो रहे इस्तीफों ने असम में कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर असर डाला है। चुनाव से ठीक पहले संगठन में यह अस्थिरता पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसा होना आने वाले चुनाव में कांग्रेस के लिए बिल्कुल ठीक नहीं होने जा रहा।
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