तमिलनाडु में विपक्षी द्रमुक ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह पंजाब और ओड़िशा की तरह लॉकडाउन (बंद) की अवधि को अप्रैल अंत तक के लिए बढ़ाए ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने यह अपील ऐसे समय में की है जब मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में राज्य की कैबिनेट बंद की अवधि बढ़ाने पर फैसला करने वाली है।
कोविड-19 संकट से निपटने के लिए आवश्यक कदमों के संबंध में सलाह देने के लिए राज्य सरकार ने 19 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित है। इस समिति ने भी 14 अप्रैल के बाद और दो सप्ताह के लिए बंद लागू रखने की शुक्रवार को सिफारिश की। तमिलनाडु में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक 911 मामले सामने आ चुके हैं। स्टालिन ने शनिवार को पलानीस्वामी को पत्र लिखकर बंद की अवधि बढ़ाए जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस संक्रमण की रोकथाम के लिए पृथक रहना महत्वपूर्ण एहतियाती कदम है, ऐसे में कई राज्यों ने केंद्र से बंद की अवधि बढ़ाने की अपील की है।
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स्टालिन ने कहा, ‘‘ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बंद की अवधि क्रमश: 30 अप्रैल और एक मई तक के लिए बढ़ा दी है। तमिलनाडु में भी बिना देर किए यह निर्णय लिया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि बंद के कारण गरीबों, किसानों, श्रमिकों और छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि बंद की अवधि में इन लोगों को परेशानी नहीं हो। उन्होंने लोगों को पांच हजार रुपए की नकद सहायता के अलावा चावल और दाल जैसे आवश्यक सामान मुहैया कराए जाने की मांग की।
स्टालिन ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह इस मामले पर चर्चा के लिए राज्य सरकार ने भी सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं की। उन्होंने कोविड-19 से निपटने के लिए विधायकों की निधि से एक करोड़ रुपए का इस्तेमाल करने के राज्य सरकार के फैसले की आलोचना की और कहा, ‘‘यह निर्णय लेना विधायक का नैतिक अधिकार हैं । राज्य सरकार का इस अधिकार को छीनना अनुचित है।’’


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