बैंक शब्द सुनते ही सबसे पहले हमें रुपयों के लेनदेन से संबंधित विचार आते है। बैंकिंग सिस्टम में यही होता भी है कि लोग सुरक्षा की दृष्टि से या ब्याज कमाने के लिए बैंक में अपनी-अपनी बचत राशि को जमा कराते हैं और जरूरत पड़ने पर निकालते रहते हैं। हालांकि, महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में आम बैकिंग सिस्टम के विपरीत एक अलग ही व्यवस्था चलाई जा रही है। महाराष्ट्र के अकोला जिले के सांघवी मोहाली गांव में 52 साल के नरेश देशमुख ‘गोट बैंक ऑफ कारखेड़ा’ का संचालन कर रहे है।
नरेश देशमुख ने बताया कि उन्हें इस बकरी बैंक को खोलने की प्रेरणा दो साल पहले बकरी पालन करने वाले मेहनती और ईमानदार मजदूरों के परिवारों से मिली। उन्होंने इस बात पर गौर किया कि यह परिवार मजदूरी करने के साथ ही बकरियां पालते हैं, जिससे इन्हें आर्थिक मदद मिलती है। साथ ही इस काम से यह परिवार छोटी-मोटी जमीन खरीदना, बच्चों की पढ़ाई और शादियां भी कर पाते है।
उन्होंने जुलाई 2018 को इस योजना की शुरुआत की थी। देशमुख ने कहा कि इच्छुक किसानों को लोन मुहैया कराने के लिए किसान को 1200 रुपए देकर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। अग्रीमेंट और लोन की शर्तों के अनुसार हर व्यक्ति को एक बकरी दी जाती है, लेकिन इसके बदले में किसान को 40 महीने के अंदर 4 बकरी के बच्चे देने होते है।
गांव में रहने के दौरान देशमुख ने देखा कि आर्थिक रूप से कमजोर महिला किसान बकरी पालन के जरिए छोटी जमीन तक खरीदती है, अपने बच्चों को पढ़ाती हैं, यहां तक कि शादी भी धूमधाम से करती है। बकरी पालन करने वालों के बारे में जानकारी हासिल करने के बाद देशमुख ने फैसला लिया कि वो गोट बैंक की शुरुआत करेंगे, वह इस सेक्टर को संगठित करेंगे और लोन स्कीम की शुरुआत करेंगे।
नरेश देशमुख ने इस बिजनेस में शुरुआत में 40 लाख रुपए का निवेश किया और 340 वयस्क बकरियों को खरीदा। इसके बाद 340 बकरी पालन करने वाले परिवारों का रजिस्ट्रेशन कराया गया, सभी को एक-एक बकरी दी गई। इस योजना के आंकलन के अनुसार हर महिला जोकि एक बकरी का पालन करती है, वो 2.5 लाख रुपए तक का मुनाफा कमाती है। इस योजना को प्रदेशभर में काफी सराहा जा रहा है।


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