लोक गायक इन्द्र जीत की पहल मोनाल कलगी का प्रचलन खत्म कर लोगों को कृत्रिम कलगी लगाने के लिए कर रही प्रेरित

Summary :

Himachal Pradesh folk singer Inder Jeet: हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक टोपी में मोनाल पक्षी की कलगी के उपयोग से इस सुंदर एवं संरक्षित पक्षी पर पड़ रहे खतरे को देखते हुए प्रसिद्ध हिमाचली लोक गायक इन्द्र जीत नें एक सराहनीय पहल की। इसके तहत उन्होंने मोनाल की वास्तविक कलगी के स्थान पर चांदी से बनी कृत्रिम कलगी के उपयोग को बढ़ावा दिया, जिससे वन्यजीव संरक्षण को समर्थन मिला। इन्द्र जीत के गीत ने बदल दी लोगों की सोच इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में उनके गीत “पाखली माणु” की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस गीत के माध्यम से लोक गायक…

Himachal Pradesh folk singer Inder Jeet: हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक टोपी में मोनाल पक्षी की कलगी के उपयोग से इस सुंदर एवं संरक्षित पक्षी पर पड़ रहे खतरे को देखते हुए प्रसिद्ध हिमाचली लोक गायक इन्द्र जीत नें एक सराहनीय पहल की। इसके तहत उन्होंने मोनाल की वास्तविक कलगी के स्थान पर चांदी से बनी कृत्रिम कलगी के उपयोग को बढ़ावा दिया, जिससे वन्यजीव संरक्षण को समर्थन मिला।

इन्द्र जीत के गीत ने बदल दी लोगों की सोच

इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में उनके गीत “पाखली माणु” की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस गीत के माध्यम से लोक गायक इन्द्र जीत ने मोनाल पक्षी की असली कलगी के स्थान पर कृत्रिम कलगी को अपनाने का संदेश दिया, जो लोगों के दिलों को छू गया। इस संदेश को व्यापक जनसमर्थन मिला और लाखों लोगों ने कृत्रिम कलगी को अपनाया तथा उसे काफी पसंद किया। इसका प्रभाव इतना व्यापक रहा कि हिमाचल प्रदेश के बाहर भी कृत्रिम कलगी का चलन (ट्रेंड) देखने को मिला।

इन्द्र जीत को वन विभाग से मिला प्रशंसा पत्र

इस गीत को यूट्यूब पर लगभग 1.34 करोड़ से अधिक व्यूज़ प्राप्त हुए, जिससे यह संदेश व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचा। इस पहल के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में युवाओं ने पारंपरिक टोपियों में कृत्रिम कलगी को अपनाना शुरू किया, जिससे मोनाल पक्षी के संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिली। इन्द्र जीत को इस सराहनीय कार्य के लिए वन एवं वन्यजीव विभाग की ओर से प्रशंसा पत्र भी प्रदान किया गया है।

गीतों के जरिए नशा मुक्ति और सामाजिक जागरूकता का संदेश

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के प्रसिद्ध लोक गायक इन्द्र जीत ने राज्य की लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बिना किसी औपचारिक संगीत प्रशिक्षण के भी उन्होंने अपने लोक गीतों के माध्यम से हिमाचली परंपराओं, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य यंत्रों और पहाड़ी जीवन शैली को व्यापक जनमानस तक पहुंचाया है। इन्द्र जीत ने अपने गीतों के माध्यम से नशा मुक्ति, महिला सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों को प्रभावी रूप से उठाया है, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश गया है।

रिपोर्ट: शिमला, विक्रांत सूद

Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।