रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) पर गुमराह कर रही कांग्रेस सरकार: अनुराग सिंह ठाकुर

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Himachal Revenue Deficit Grant Ended: पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने आज हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट, राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को सोलहवें वित्त आयोग (एफसी-16) द्वारा बंद किए जाने के संबंध में की गई टिप्पणियों पर एक विस्तृत तथ्यात्मक जानकारी प्रजेंटेशन के माध्यम से साझा की है। अनुराग सिंह ठाकुर की यह प्रजेंटेशन 16 वें वित्त आयोग के आंकड़ों और आयोग की रिपोर्ट में प्रस्तुत विश्लेषण पर आधारित है, जो हिमाचल प्रदेश में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट करता है। अपने वित्तीय कुप्रबंधन का ठीकरा केंद्र…

Himachal Revenue Deficit Grant Ended: पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने आज हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट, राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को सोलहवें वित्त आयोग (एफसी-16) द्वारा बंद किए जाने के संबंध में की गई टिप्पणियों पर एक विस्तृत तथ्यात्मक जानकारी प्रजेंटेशन के माध्यम से साझा की है। अनुराग सिंह ठाकुर की यह प्रजेंटेशन 16 वें वित्त आयोग के आंकड़ों और आयोग की रिपोर्ट में प्रस्तुत विश्लेषण पर आधारित है, जो हिमाचल प्रदेश में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट करता है।

अपने वित्तीय कुप्रबंधन का ठीकरा केंद्र पर ना फोड़े हिमाचल सरकार- अनुराग ठाकुर

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सदा हिमाचल के हितों का विशेष ध्यान रखा है, और कभी किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आने दी। यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) पर कांग्रेस सरकार प्रदेश को गुमराह कर रही है।

मेरा हिमाचल की कांग्रेस सरकार से निवेदन है कि अपने वित्तीय कुप्रबंधन का ठीकरा केंद्र पर ना फोड़े। मैं आकड़ों से साफ़ करना चाहूँगा कि नई फॉर्मूले के तहत हिमाचल का हिस्सा वास्तव में बढ़ा है, उस से पहले मैं बताना चाहूँगा कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट कोई स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी व्यवस्था थी और 16 वें वित्त आयोग ने सामान्य आरडीजी की सिफारिश नहीं की क्योंकि कई प्राप्तकर्ता राज्यों, जिसमें हिमाचल भी शामिल है ने लगातार कमजोर कर प्रयास और उच्च प्रतिबद्ध व्यय का पैटर्न देखा गया”

हिमाचल का डेवोल्यूशन घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है- अनुराग सिंह ठाकुर

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “हिमाचल का डेवोल्यूशन घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है। “अन्यायपूर्ण कटौती” के कांग्रेस के खोखले दावों के विपरीत, 16 वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश का विभाज्य पूल में हिस्सा 15वें वित्त आयोग के 0.830% से बढ़ाकर 0.914% कर दिया है। नए फॉर्मूले के तहत हिमाचल का पोस्ट-डेवोल्यूशन प्राप्ति 2025-26 के बजट अनुमान (बीई) में लगभग ₹11,561.66 करोड़ से बढ़कर 13,949.97 करोड़ हो गया है, जो लगभग 2,388 करोड़ की वृद्धि है। यह केंद्रीय कर डेवोल्यूशन में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है।

15 वें वित्त आयोग के तहत कोविड से उबरने में राज्यों की मदद के लिए आरडीजी फ्रंट-लोडेड था और इसे स्पष्ट रूप से समय-बद्ध, संक्रमणकालीन उपाय के रूप में तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य राज्यों को 2025-26 तक लगभग शून्य राजस्व घाटे तक लाना था। 16 वें वित्त आयोग ने परिणामों की समीक्षा की और निष्कर्ष निकाला कि 14 वें वित्त आयोग और 15 वें वित्त आयोग के तहत बड़े आरडीजी हस्तांतरणों के बावजूद, वास्तविक राजस्व घाटा सामान्य की ओर नहीं बढ़ा क्योंकि कई राज्यों ने राजस्व संग्रहण को मजबूत नहीं किया या व्यय को युक्तिसंगत नहीं बनाया।

इसलिए 16 वें वित्त आयोग ने सामान्य आरडीजी को जारी रखना प्रतिकूल माना, क्योंकि यह विकृत प्रोत्साहन पैदा कर सकता है और संरचनात्मक सुधारों की दबाव को कम कर सकता है।”

‘मोदी सरकार राज्यों के साथ भेदभाव नहीं करती’

अनुराग सिंह ठाकुर ने बताया कि मोदी सरकार राज्यों के साथ भेदभाव नहीं करती है। 16 वें वित्त आयोग फॉर्मूले के तहत कई विपक्षी शासित राज्यों को भी डेवोल्यूशन में लाभ हुआ है। 16 वें वित्त आयोग द्वारा शुरू की गई क्षैतिज पुनर्वितरण (horizontal redistribution) में मानदंडों का पुनः-वेटेज किया गया, जिसमें जनसंख्या/जनसांख्यिकीय प्रदर्शन पर भार बढ़ाया गया और जीडीपी में योगदान के लिए 10% वेटेज जोड़ा गया, जबकि क्षेत्रफल पर भार कम किया गया। इस से कई राज्यों को लाभ हुआ, जिनमें कई विपक्षी शासित राज्य भी शामिल हैं, जबकि कुछ अन्य राज्यों को कमी आई। इसलिए 16 वें वित्त आयोग के समायोजन को पक्षपातपूर्ण अभ्यास के रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता।”

अनुराग ठाकुर ने की हिमाचल और उत्तराखंड की तुलना

Himachal Revenue Deficit Grant Ended
Himachal Revenue Deficit Grant Ended (Image- Social Media)

अनुराग ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की तुलना उत्तराखंड से करते हुए बताया कि इन्हीं मापदंडों ने आयोग के निर्णय को प्रभावित किया।

1- कम स्वयं-कर प्रयास (Low own-tax effort) हिमाचल का 2023-24 में स्वयं का कर राजस्व GSDP का लगभग 5.6% था, जबकि उत्तराखंड का स्वयं का कर प्रयास लगभग 6.1% था। यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि उच्च कर प्रयास से केंद्र से ट्रांसफर पर निर्भरता कम होती है।

2- बड़ी राजस्व व्यय (और कम वित्तीय स्थान) हिमाचल का कुल राजस्व व्यय GSDP का लगभग 21.0% था, जबकि उत्तराखंड का 15.0% था, जो दर्शाता है कि हिमाचल में आवर्ती प्रतिबद्धताएं अधिक हैं जो विकास व्यय को सीमित करती हैं।

3- उच्च राजकोषीय और राजस्व घाटा, हिमाचल ने 2023-24 में GSDP का ≈5.3% राजकोषीय घाटा और ≈2.6% राजस्व घाटा दर्ज किया, जबकि उत्तराखंड का राजकोषीय घाटा ≈2.5% और राजस्व अधिशेष ≈1.1% था। लगातार राजस्व घाटा ठीक वही समस्या है जिसे RDG (Revenue Deficit Grants) समाप्त करने के लिए बनाए गए थे, न कि बनाए रखने के लिए।

4- भारी देनदारियां(ऋण बोझ), हिमाचल की बकाया देनदारियां 2023-24 में GSDP की लगभग 42.8% थीं, जबकि उत्तराखंड की ≈25.5% थीं। उच्च ऋण से ब्याज भुगतान बढ़ता है और वित्तीय लचीलापन कम होता है।

5- कम पूंजीगत व्यय (Low capital expenditure push), आंकड़े दिखाते हैं कि हिमाचल का कुल व्यय में पूंजीगत व्यय (capex) का हिस्सा अन्य राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है, जो संकेत देता है कि बजट का बड़ा हिस्सा राजस्व व्यय और ऋण सेवा में खपत हो रहा है, न कि उत्पादक निवेश में।

ये मापदंड ही कारण हैं कि 16 वें वित्त आयोग ने यह निर्णय लिया कि सामान्य RDG को जारी रखना, जो संरचनात्मक वित्तीय कमजोरियों को छिपाता है, उचित नीति समाधान नहीं है। अनुराग सिंह ठाकुर ने जोर दिया कि आयोग की सिफारिशें इन मापने योग्य वित्तीय वास्तविकताओं पर आधारित हैं, न कि पक्षपातपूर्ण विचारों पर या कांग्रेस की आधारहीन बयानबाजी पर।

FC-16 के तहत हिमाचल का डेवोल्यूशन लगभग 2,388 करोड़ बढ़ा

अनुराग सिंह ठाकुर ने वित्त आयोगों में RDG (राजस्व घाटा अनुदान) की यात्रा का वर्णन किया। पहले के वित्त आयोग (जैसे FC-12/FC-13) ने RDG को विशेष श्रेणी के राज्यों तक सीमित रखा था। FC-14 ने कई राज्यों के फिर से घाटे में चले जाने पर बड़े RDG को फिर से शुरू किया। FC-15 ने COVID के बाद फ्रंट-लोडेड ब्रिज ग्रांट्स प्रदान किए, जिनका स्पष्ट उद्देश्य 2025-26 तक राजस्व घाटा लगभग शून्य करना था।

FC-16 की मूल्यांकन के अनुसार RDG सुधारात्मक के बजाय आवर्ती (recurrent) ट्रांसफर बन गए हैं, इसलिए इसने नियमित RDG को बंद करने का फैसला किया और इसके बजाय लक्षित उपकरणों (targeted instruments) तथा आवश्यकता अनुसार बढ़ी हुई डेवोल्यूशन का समर्थन करने की सिफारिश की। यह ऐतिहासिक तथ्य दर्शाते हैं कि FC-16 का कदम एक स्थापित नीति चक्र की पूर्णता है, जो अस्थायी राहत से सुधार-उन्मुख, सशर्त ट्रांसफर की ओर बढ़ रहा है”

अनुराग सिंह ठाकुर ने अपनी बातचीत का समापन हिमाचल प्रदेश के लोगों से सीधे अपील करके किया” हिमाचल प्रदेश की जनता कांग्रेस के खोखले दावों से ना भटके। आयोग के आंकड़े दिखाते हैं कि FC-16 के तहत हिमाचल का डेवोल्यूशन लगभग 2,388 करोड़ बढ़ा है। हम जिस चुनौती का सामना कर रहे हैं, वह यह नहीं है कि कौन किससे ले रहा है, बल्कि यह है कि हम वित्तीय अनुशासन कैसे बहाल करें, कर प्रयास कैसे सुधारें और अपने भविष्य में निवेश कैसे करें। यही हिमाचल के लिए स्थायी समृद्धि का मार्ग है।”

रिपोर्ट- विक्रांत सूद

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Bhawana Rawat

भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।